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Tuesday, 3 February, 2026
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झारखंड में भाजपा के प्रदर्शन के बाद यह अनुमान लगाना गलत है कि मोदी सरकार को हराया जा सकता है

एक वाक्य में कहें तो मामला ये है कि राज्यों में हो रही चुनावी जीत को विकल्प के रूप में नहीं देखा जा सकता, सत्तापक्ष को राष्ट्रीय राजनीति की जमीन पर पटखनी देनी होगी.

वर्ण व्यवस्था को मजबूत करती मनुस्मृति का दहन दिवस क्या आज भी प्रासंगिक है

जब से केंद्र की सत्ता में भाजपा की सरकार आई है ऐसा क्यूं है कि संविधान बनाम मनुस्मृति पर चर्चा गरमाने लगी है. एक के बाद एक संविधान पर प्रहार किया जा रहा है.

भाजपा अटल के नीति और सिद्धांतों से इतनी दूर जा चुकी है कि उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते सच्ची नहीं लगती

अटल ने कहा था, ‘सत्ता का खेल चलता रहेगा, सरकारें आयेंगी, जायेंगी, पार्टियां बनेंगी और बिगड़ेंगी, मगर यह देश रहना चाहिए, इस देश का लोकतंत्र रहना चाहिए.’

इतना बचकाना बयान कैसे दे सकते हैं पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के मुखिया एहसान मनी

आईपीएल में दुनिया भर के स्टार खिलाड़ी हिंदुस्तान में हर साल जुटते हैं. लिहाजा सुरक्षा को लेकर भारत और पाकिस्तान में कोई तुलना ही नहीं है.

राष्ट्रव्यापी एनआरसी की नाकामी तय है, मोदी सरकार को अपनी नागरिकता योजना के लिए यह करना चाहिए

अपूर्ण दस्तावेजों वाली मौजूदा स्थिति में 130 करोड़ लोगों को एनआरसी प्रक्रिया में झोंक कर मोदी सरकार मुसीबत ही मोल लेगी.

आधी सदी तक संघर्षों के ताप में तपा है सोरेन परिवार

हेमंत सोरेन झारखंड में संघर्ष की एक लंबी परंपरा के वारिस हैं, जिनका नेतृत्व उनके पिता और आदिवासियों के दिशोम गुरू कहे जाने वाले शिबू सोरेन ने किया था.

सीएए में अछूतों को प्राथमिकता से पनाह मिले, पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न की बात क्यों गलत है

कानून में ये स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जाति व्यवस्था से उत्पीड़ितों को भारत में विशेष नागरिकता के प्रावधान होंगे. उन्हें भारत के एससी-एसटी एक्ट से लेकर आरक्षण समेत सभी नागरिक सुविधाएं दी जाएंगी.

मोदी झारखंड इसलिए हारे क्योंकि उनकी प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं- विकास पुरुष से लेकर हिंदू रक्षक तक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के पहले कार्यकाल और वर्तमान में काफी भारी अंतर है. कल्याणकारी और ग्रामीण योजनाओं पर जो पहले ध्यान था वो अब धुंधली हो चुकी है.

अमित शाह सीएए, कश्मीर और एनआरसी के ज़रिए प्रधानमंत्री मोदी के साये से बाहर निकल चुके हैं

तीन तलाक़ कानून को कार्यरूप देकर, जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म कर और सीएए को पारित करा कर अमित शाह गृहमंत्री के रूप में शुरुआती महीनों में ही मोदी सरकार पर अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे हैं.

सीएए-एनआरसी के खिलाफ़ यह केवल मुस्लिमों का नहीं, हर किसी का आक्रोश है

छात्र अलग कारण से, तो मुस्लिम और असमी लोग अलग कारण से नागरिकता कानून (सीएए) का विरोध कर रहे हैं. लेकिन मोदी सरकार ने यह जो कानून बनाया है उसकी असंवैधानिकता के सवाल पर मतभेद भी हैं.

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