जब तक कोई बड़ा उलटफेर नहीं होता, भारत की विदेश नीति का मूल, जो कम से कम साल 2000 से अमेरिका, पाकिस्तान, चीन और रूस पर केंद्रित रही है, टूटने के कगार पर है.
चुनाव आयोग को विपक्ष की 'वोट चोरी' की शिकायतों को गंभीरता से लेने का कोई कारण नज़र नहीं आता. 'तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई?' — ऐसा जवाब एक ईमानदार और सच्चा संविधान का संरक्षक कभी नहीं देगा.
अगर मुख्य चुनाव आयुक्त और विपक्षी नेताओं के बीच रिश्ते बिगड़ते हैं, तो लोगों का चुनाव के नतीजों पर से भरोसा उठ सकता है. यह भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे बुरी स्थिति होगी.
जैसे-जैसे हम ‘आज़ादी का अमृत काल’ की ओर बढ़ रहे हैं, हमें अपने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान याद रखने चाहिए और विकास की गति को और तेज़ करना होगा, ताकि सबको ऊर्जा और समृद्धि मिल सके.
अब जबकि मई की 87 घंटे लंबी जंग में IAF और PAF दोनों ने एक-दूसरे के विमान गिराने का औपचारिक दावा किया है, तो बड़ा सवाल यह उठता है: क्या ऐसे आंकड़े वाकई मायने रखते हैं?
राहुल गांधी और कांग्रेस अपने आरोपों पर कभी भी स्थिर नहीं रही है. वे अपनी हार की वजह अपने नेतृत्व की क्षमता और संगठन में ढूंढने के बजाय अलग-अलग प्रक्रियाओं में ढूंढते हैं. राहुल गांधी एक नेता की तरह नहीं, बल्कि गांव के मास्टर की तरह नजर आते हैं.
CAPF में हर स्तर पर पहले से ही पदोन्नति की रुकावट रहती है. ऐसे में अगर सबसे ऊपर का पद बाहर से आए किसी आईपीएस अधिकारी को दे दिया जाए, तो नीचे के अफसरों की तरक्की लगभग रुक जाती है.