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Monday, 2 February, 2026
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दिल्ली गैंगरेप और हत्या मामले में दोषियों को फांसी में ‘देरी’ पर सवाल उठाना क्यों गलत है

तत्काल फांसी दिए जाने की की मांग करने वाले भूल जाते हैं कि न सिर्फ मृत्युदंड पाया कैदी, बल्कि उसकी तरफ से कोई भी दया की अर्जी लगा सकता है.

मोदी-शाह सरकार मानव संसाधन के गंभीर संकट का सामना कर रही है, प्रतिभाओं का अभाव दिख रहा है

प्रधानमंत्री मोदी की अत्यंत महान नेता की और शाह की एक अभूतपूर्व रणनीतिकार की छवि निर्मित की गई है. पर वे प्रतिभाओं को आगे लाने में बुरी तरह नाकाम रहे हैं.

सौ साल पहले किसानों के आंदोलन और शक्ति प्रदर्शन का बड़ा केंद्र थी अयोध्या

इतिहास की पुस्तकों में यह शक्तिप्रदर्शन अयोध्या कांफ्रेंस के नाम से दर्ज है, जिसमें कोई एक लाख किसानों ने भाग लिया था. उस वक्त के लिहाज से यह संख्या बहुत बड़ी थी.

शाहीन बाग से उभरते सवालों ने समाजवादी आंदोलन के विचार को और प्रासंगिक बना दिया है

मुस्लिम समाज के सवालों की गहराई में कहीं न कहीं मौजूदा लोकतांत्रिक व्यवस्था में उचित प्रतिनिधित्व का न होना ही समझ आता है. समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो यह संकट कई रूपों में सामने आएगा.

पार्टी प्रमुख के रूप में अमित शाह द्वारा भाजपा-आरएसएस के पाखंड को उजागर करना सबसे बड़ा योगदान था

भाजपा की गौरव गाथा में मोदी ही मुख्य कारक रहे हैं, भले ही अमित शाह को चाणक्य बताया जाता हो. ऐसा लगता है कि इस बार चंद्रगुप्त की वजह से ही चाणक्य का नाम हुआ है.

चंडीगढ़ का मूल डिज़ाइनर ली कार्बूजियर नहीं, बल्कि गीता में आस्था रखने वाला पॉलैंड का एक वास्तुकार था

चंडीगढ़ को 1950 में अल्बर्ट मेयर की टीम में शामिल हुए मैथ्यू नोवित्स्की के नगर के रूप में जाना जाता, पर एक हादसे के कारण ऐसा नहीं हो पाया.

बॉस बाजवा को सेवा-विस्तार मिला, मुझे नहीं पर चिंता मत करो पाकिस्तानी दोस्तों मैं जनरल ट्विटर बनूंगा

आपको गौरवान्वित करने वाले और अपने ट्वीटों से आपकी रक्षा करने वाले डीजी आईएसपीआर को जनरल बाबर इफ़्तिखार के लिए पद छोड़ने को बाध्य होना पड़ा. पर नो इश्यू, ले लो टिश्यू.

क्या रेत की तरह जम्मू-कश्मीर में महबूबा मुफ्ती के हाथों से फिसल रही है पीडीपी

महबूबा मुफ्ती और उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदी उमर अब्दुल्ला ने लगभग एक साथ ही राजनीति में प्रवेश किया था. अगर दोनों के राजनीतिक सफ़र पर नज़र दौड़ाई जाए तो साफ पता चलता है कि महबूबा का राजनीति में उमर के मुक़ाबले पांव जमाना काफी मुश्किल रहा है.

लोकतंत्र एक फिल्मी ट्रैजडी है जहां सरकार लाइट और कैमरे के लिए एक्शन लेती है

कई नामी-गिरामी अखबार इस सरकार की नीतियों का विश्लेषण प्रताप भानु मेहता और रामचंद्र गुहा जैसे राजनीतिशास्त्र के जानकारों से करवाते हैं. यह अनुपयोगी है. अगर इस सरकार की नीतियों को समझना चाहते हैं तो इस पर करण जौहर से लेख लिखवाइए.

सहज प्रतिक्रिया हमेशा आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं होती, मोदी सरकार को ये बात समझनी चाहिए

हाल के अनुभव तो यही बताते हैं कि आर्थिक मसलों को हल करने के मामले में सरकार ने पिछली सीखों से कोई सबक नहीं लिया है.

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मांग मजबूत रहने से जनवरी में वाहन कंपनियों की बिक्री बढ़ी

नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, महिंद्रा और हुंदै जैसी प्रमुख वाहन कंपनियों ने जनवरी में बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.