मक्का में सबकुछ ठप है. पोप का ईश्वर से संवाद स्थगित है. ब्राह्मण पुजारी मंदिरों में प्रतिमाओं को मास्क लगा रहे हैं. धर्म ने कोरोनावायरस से भयभीत इंसानों को असहाय छोड़ दिया है.
चीन के वुहान प्रातं से शुरू हुआ कोरोनावायरस वास्तविक और आभासी दुनिया के समाचार, रिपोर्ट, गपशप, और हर एक के लिए अफवाहों का एक मध्य बिंदु बन गया है. ऐसे समय में स्वामी विवेकानंद के प्लेग मैनिफेस्टो को याद करने की जरूरत है.
अहम मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी में आपातकाल के दौरान के इसके रवैये की गूंज सुनाई देती है, जब शीर्षस्थ अदालत दबाव में टूट कर सत्तारूढ़ दल के इरादों के अनुरूप चलने लगी थी.
न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होने के चंद महीनों के भीतर ही नये पदों पर उनकी नियुक्तियों और मनोनयन को उनके कुछ फैसलों से भी जोड़कर देखने की प्रवृत्ति बढ़ रही है.
प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी जी ने अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि बनाने कि कोशिश कि थी, लेकिन वो अब दरक गयी है. जो किसी भी हालत में भारत का विरोध नहीं करते थे वो भी आज भारत के खिलाफ खड़े हो गए हैं.
एक तरफ कोरोना वायरस फैलता जा रहा है, दूसरी ओर 12 राज्य एनपीआर और एनआरसी से इनकार कर चुके हैं, और इसलिए शाहीन बाग की प्रदर्शनकारी महिलाओं को अपनी उपलब्धियों पर गौर करते हुए अपना आंदोलन खत्म कर देना चाहिए.
शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों के चैंबर में सूचीबद्ध सारे मामले स्थगित कर दिये गये हैं. जबकि रजिस्ट्रार के समक्ष 16 से 20 मार्च के दौरान सूचीबद्ध मामले भी स्थगित कर दिये गये हैं.
‘अपनी पार्टी’ में शामिल होने वाले नेताओं में सबसे अधिक बड़ा व बहुचर्चित नाम गुलाम हसन मीर का है. जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अब्दुल्ला व मुफ्ती परिवारों की तरह ही गुलाम हसन मीर की अपनी पहचान है.