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Monday, 2 March, 2026
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कमलनाथ ने मध्य प्रदेश में एक भी ऐसा काम नहीं किया कि उनकी सरकार के गिरने का लोग दुख मनाएं

चुनावी वादों को पूरा करने में मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार पूरी तरह नाकाम रही. ऐसे में 22 विधायकों के इस्तीफे से जो सीटें खाली हुई हैं, वहां होने वाले उपचुनावों में कांग्रेस कमजोर विकेट पर होगी.

कोरोना लॉकडाउन में लोगों और अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए मोदी सरकार को ये 3 कदम तो उठाने ही चाहिए

स्वास्थ्य सेवाओं को अपनी बेहतर तैयारी के लिए लॉकडाउन से मदद तो मिलेगी मगर करोड़ों लोग बेरोजगार और बदहाल हो जाएंगे. बहरहाल, सरकार ने 1.7 लाख करोड़ के पैकेज की जो घोषणा की है उसे राहत पहुंचाने का शुरुआती कदम माना जा सकता है

कोरोनावायरस 9/11 के आतंकी हमले और 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट की तरह दुनिया को बदल देगा

कोरोनोवायरस महामारी की अवधि बताती है कि हमें सभी को मुक्त रूप से राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की आवश्यकता है. आपका स्वास्थ्य अचानक मेरी समस्या है.

क्या कोरोनावायरस महामारी से बचने के लिए डिजिटल निगरानी का रोल होना चाहिए

सरकार लोगों की तमाम जानकारियां इकट्ठा कर एक लाइव डेटाबेस तो बना रही है लेकिन खुद अपना हिसाब देने वाले सूचना अधिकार क़ानून को लगातार कमज़ोर क्यों कर रही है?

कोरोनावायरस ने बता दिया कि देश में पप्पू कौन है- हाशिए पर खड़ा आदमी

21 दिनों के बाद एक नया हिंदुस्तान नजर आएगा. एक तरफ कालिदास और वराहमिहिर की औलादें होंगी, दूसरी तरफ लाइफ क्रूसेड में बच गये लोग.

कोरोनावायरस की इस आपदा में कहां हैं सामाजिक सरोकार वाले एनजीओ, यह उनकी परीक्षा की घड़ी है

देश में 33 लाख से अधिक ऐसे संगठन हैं जिन्हें सरकारों से आर्थिक मदद मिलती रही है ऐसे संगठनों को अब आगे आकर अपनी भूमिका निभानी चाहिए.

आतंकवादी कोरोना को हथियार बना सकते हैं, सशस्त्र सेनाओं को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की ज़रूरत है

महामारी के तीसरे और चौथे चरण में संक्रमित लोगों की बड़ी संख्या संसाधनों पर भारी पड़ती है. ऐसे में सशस्त्र सेनाएं सरकार की बहुत मदद कर सकती है.

भारत की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल स्थिति में है इसलिए कोविड-19 महामारी के दौरान जानकारी ही बचाव है

कोरोनावायरस, महामारी बनकर सिर्फ़ वहीं कहर बरपा रहा है, जहां इसे नये व्यक्तियों को संक्रमित करने से नहीं रोका जा सका है.

कसम सोशल मीडिया की, देशवासियों को कोविड-19 से जंग में जीत की उम्मीदों का लाॅकडाउन गवारा नहीं

कोरोनावायरस महामारी के बीच कहा जा रहा है कि इसने लोगों के दिलोदिमाग पर भी कब्जा कर लिया है, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफार्म इसकी गवाही नहीं देते.

मोदी के कोविड-19 लॉकडाउन भाषण से पता चलता है कि वह पिछली गलतियों से सीखते नहीं हैं, या परवाह नहीं करते

कोरोनोवायरस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे भाषण से पता चलता है कि वह नेहरू जैसे ही हैं. वह चुनाव तो जीत सकते हैं, पर और कुछ नहीं.

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ठाणे: किशोर ने स्कूल में की गई शरारतों को लेकर माता-पिता की डांट के डर से आत्महत्या की

ठाणे, दो मार्च (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे शहर में 13 वर्षीय एक लड़के ने कथित तौर पर अपने घर में आत्महत्या कर ली। बताया...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.