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Sunday, 1 February, 2026
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कोरोनावायरस: अंधविश्वास और पाखंड की शुरुआत बीजेपी ने नहीं, नेहरू ने की थी

देश के वामपंथी, उदारवादी, प्रगतिशील बुद्धिजीवियों की शिकायत है कि बीजेपी ने शासन में आने के बाद वैज्ञानिक चिंतन का नाश हो गया, जबकि आजदी के समय नेहरू की पुजा-अर्चना को याद करनी चाहिए.

आप क्रोनोलॉजी समझिए, मोदी ने कोविड-19 की दवा के निर्यात को लेकर ट्रंप के सामने घुटने नहीं टेके

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और पैरासिटामोल लंबे समय से पेटेंट-मुक्त और सस्ती जेनेरिक दवाएं हैं. भारत के पास दुनिया के लिए इनके उत्पादन की विशिष्ट क्षमता है. हमें इसका इस्तेमाल करना चाहिए, इसे बेकार नहीं जाने देना चाहिए.

कोरोना संकट में भारत के लिए बड़े आर्थिक फायदे निहित है: जयंत सिन्हा

दुनियाभर के देशों ने राजकोषीय नियमों से किनारा कर लिया है और वे अर्थव्यवस्था में ठहराव से बचने के लिए बेहिचक होकर खर्च कर रहे हैं.

कोरोनावायरस: मोदी सरकार की शह में छद्म विज्ञान से हो रहा है विज्ञान का कत्ल

सत्ता पक्ष कि शह कि वजह से आज भारत में तार्किकता और वैज्ञानिकता का स्पेस कम होता जा रहा है और छद्म विज्ञान और अंधविश्वास ने उसकी जगह ले ली है.

हज़ारों सालों से अमृत बरसाने वाली गंगा नदी आज जहर क्यों परोस रही है

जब देशभर में लॉकडाउन चल रहा है और सिर्फ जरूरी सेवाएं ही काम कर रही हैं तब केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड यानी सीपीसीबी ने एक रिपोर्ट जारी कर कहा कि 36 निगरानी पाइंट में से 27 जगह गंगा का पानी नहाने योग्य हो गया है.

मोदी की कोविड-19 पर अपनाई गई रणनीति के आगे गांधी परिवार में भी राजनीतिक दूरियां दिखाई देती हैं

देश के प्रमुख विपक्षी दल ने सरकार को अपना पूरा समर्थन दिया है और यह भी कहा है कि लॉकडाउन का कदम 'आवश्यक' हो सकता है.

क्या जनहित के नाम पर दायर याचिकाएं कोरोनावायरस की चुनौतियों से निपटने के प्रयासों में बाधक हैं

सरकार को कोरोनावायरस महामारी के संकट पर काबू पाने और देशवासियों को इसके प्रकोप से बचाने के प्रयास के दौरान दायर हो रही इस तरह की याचिकाओं पर आपत्ति है.

लॉकडाउन और नोटबंदी के बीच जो समानता है वो मोदी सरकार की तैयारियों में कमी है

वित्तीय स्थिति के लिहाज से हम तीस साल पीछे चले गए हैं. अब यही उम्मीद की जा सकती है कि एक-दो तिमाही तक अर्थव्यवस्था सिकुड़ती रहेगी और उसके बाद धीरे-धीरे ही सुधरेगी.

आप ताली, थाली, दीया और मोमबत्ती का चाहे जितना मजाक बना लें, मोदी को इससे फर्क नहीं पड़ता

मोदी को अच्छी तरह मालूम है कि उन्हें किसे संबोधित करना है, किसकी उपेक्षा करनी है, और किसे लाभ पहुंचाना है. इसलिए आप उनकी ताली, थाली, दीया, मोमबत्ती का मजाक उड़ाते रहिए.

मोदी, ट्रंप से लेकर मैक्रों तक जंग की भाषा बोल रहे हैं पर कोरोनावायरस कोई ‘दुश्मन’ नहीं

कोरोनावायरस महामारी के ख़िलाफ़ फ़ुर्ती से और कारगर उपाय करें, लेकिन ऐसा करते हुए युद्ध का आदर्श अपने सामने रखेंगे तो हम भारी चूक करेंगे.

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बैतूल (मप्र), एक फरवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में सरकार द्वारा आवंटित एक ई-साइकिल की बैटरी फट जाने से 30 वर्षीय एक दिव्यांग...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

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