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Sunday, 1 February, 2026
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कोरोनावायरस के दौर में ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले की याद

उस दौर में महाराष्ट्र में पड़े अकाल और प्लेग जैसी महामारी में ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले दंपति की भूमिका को, आज याद करना अत्यन्त जरूरी है, जब पूरा विश्व कोरोना महामारी का सामना कर रहा है.

भारत में कोरोनावायरस के युग में दबंग पुलिस कैसे हर दिल अज़ीज़ बन गई

जब पुलिस गरीबों की मदद नहीं कर रही होती है या यूपी पुलिस की तरह मुस्लिमों के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए चलाई गई फेक खबरों का खंडन नहीं कर रही होती तो वो ग्राउंड पर गानें गाती हुई दिखाई देती है.

कोरोनावायरस संकट के समय पुलिस के सामने कई चुनौतियां, तय करने होंगे अलग मापदंड

भारत में पुलिस राष्ट्रीय कोरोनावायरस संकट के समय में कानून और व्यवस्था बनाए रखने का उल्लेखनीय काम कर रही है.

मोदी सरकार अकेले कोविड-19 से नहीं लड़ सकती, उसे आरएसएस जैसे ज़मीनी सिपाहियों का साथ चाहिए

आरएसएस अपने स्वयंसेवकों को राहत शिविर संचालित करने की ट्रेनिंग नहीं देता है. फिर भी स्वयंसेवक कोविड-19 संबंधी राहत कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं.

कोविड-19 मुसलमानों को अनौपचारिक सेक्टर की नौकरियों से बाहर करने का एक बहाना, अगला चरण नस्लभेदी होगा

मुसलमानों को आज उन्हें आर्थिक हाशिए पर डालने के सुनियोजित प्रयासों का सामना करना पड़ रहा है और इसके लिए सरासर झूठ के सहारे समुदाय को वायरस से जोड़ा जा रहा है.

कोरोनावायरस संकट अगर मोदी नहीं बल्कि मनमोहन सिंह के राज में आता तब क्या होता

मनमोहन सिंह संस्थाओं और व्यवस्था का दामन पकड़कर बिना शोरशराबा किए शासन चलाने वाले नेता रहे हैं जबकि नरेंद्र मोदी अपनी शख्सियत के बल पर अपनी कथनी और करनी में मुखर रहने वाले नेता रहे हैं. कोरोना संकट से निपटने में दोनों को अपनी-अपनी खास ताकत से बल मिलता.

मोदी को लॉकडाउन नहीं बढ़ाना चाहिए क्योंकि अर्थव्यवस्था लंबे समय तक वेंटिलेटर के सहारे नहीं चल सकती

कोविड-19 लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने की राजनीतिक सलाह मानने से पहले मोदी को इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए. कई बार इलाज मर्ज़ से भी अधिक नुकसानदेह साबित होता है.

कोरोनावायरस लॉकडाउन के कारण रोज़गार गंवाने के आंकड़े भयावह, सरकार को जल्द बड़े कदम उठाने होंगे

हम ये नहीं जानते कि कोरोनावायरस से पैदा स्वास्थ्य-संकट कितना गहन होगा और देश इससे कैसे निपटेगा लेकिन हम ये जरुर जानते हैं कि बेरोजगारी का संकट अभी ही सिर चढ़कर बोल रहा है. लोगों के जीवन और जीविका को बचाने के लिए सरकार को जल्दी ही लोक-कल्याण के मोर्चे पर कुछ वैसा करना पड़ेगा.

कोरोनावायरस: अंधविश्वास और पाखंड की शुरुआत बीजेपी ने नहीं, नेहरू ने की थी

देश के वामपंथी, उदारवादी, प्रगतिशील बुद्धिजीवियों की शिकायत है कि बीजेपी ने शासन में आने के बाद वैज्ञानिक चिंतन का नाश हो गया, जबकि आजदी के समय नेहरू की पुजा-अर्चना को याद करनी चाहिए.

आप क्रोनोलॉजी समझिए, मोदी ने कोविड-19 की दवा के निर्यात को लेकर ट्रंप के सामने घुटने नहीं टेके

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और पैरासिटामोल लंबे समय से पेटेंट-मुक्त और सस्ती जेनेरिक दवाएं हैं. भारत के पास दुनिया के लिए इनके उत्पादन की विशिष्ट क्षमता है. हमें इसका इस्तेमाल करना चाहिए, इसे बेकार नहीं जाने देना चाहिए.

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स्विस रिपोर्ट: अब ऑपरेशन सिंदूर बहस को खत्म कर देना चाहिए. यह जानना भी अहम है कि लड़ाई कब रोकनी है

किसी भी युद्ध को जीतने तो क्या, शुरू करने की कुंजी यह होती है कि उसका लक्ष्य स्पष्ट हो. यह पूरी तरह से राजनीतिक विषय होता है. यह न तो भावनात्मक मामला होता है, और न ही शुद्ध रूप से सैन्य मामला.

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पुणे, 31 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार ने राकांपा (शप) प्रमुख शरद पवार से मुलाकात...

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