आत्मनिर्भर भारत संबोधन में मोदी द्वारा प्रवासी मज़दूरों के संकट का ज़िक्र तक नहीं किए जाने से बहुतों को हैरत हुई है. फिर भी, उनके खिलाफ गुस्सा नहीं दिख रहा.
पुराने तरीके की ‘टच-एंड-फील’ राजनीति में यकीन करने वाले नेता कोविड संकट के कारण वोटरों तक पहुंचने के अधिक तकनीकी तरीके अपनाने की दुविधा का सामना कर रहे हैं.
जिस देश में अभी भी अखबारों से जच्चा-बच्चा की मौत की खबरें गायब नहीं हुईं हैं वहां हम रेखा को उनके हाल पर नही छोड़ सकते थे. उनके अस्पताल पहुंचने के बाद ही हम अपनी रिपोर्टिंग में व्यस्त हुए.
लॉकडाउन ने प्रधानमंत्री को एक मौका दिया है कि गंगा की तस्वीर से उन गलतियों को निकाल फेकें और देश की जनता के सामने वह तस्वीर रखे जो वो वास्तव में चाहते हैं.
उत्तर प्रदेश में एक समय रोजगार के कई बड़े केंद्र थे, जो अब लगभग बर्बाद हो चुके हैं. अगर स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता चाहिए तो हमें उत्तर प्रदेश के उस गौरवशाली दौर से सीखना होगा.