कोविड महामारी के कारण तमाम शैक्षिक गतिविधियां ठप पड़ी हैं और इंटनेट शिक्षा का एकमात्र माध्यम रह गया है. जम्मू-कश्मीर को 4जी से वंचित रखना मौलिक अधिकार छीनने जैसा है.
आरक्षण की अवधारणा छत्रपति शाहूजी महाराज के राज्य कोल्हापुर से ही आई है, जब उन्होंने 26 जुलाई 1902 को अपने एक आदेश से 50 प्रतिशत नौकरियों को पिछड़ी जाति के लोगों के लिए आरक्षित कर दिया था.
इस समय भारत में ये तमाम संस्थाएं अस्त-व्यस्त हैं. इन्हें ठीक करने के लिए हमें कामकाज की करिश्माई शैली नहीं, विधिसम्मत तरीके से काम करने वाली संस्थाएं चाहिए.
भारत का एक बड़ा हिस्सा (जिसमें पश्चिम बंगाल, उत्तर पूर्वी राज्य और केरल शामिल हैं) जहां वेट मार्केट यानि मीट बाजार में जानवरों का मांस बेचा जाता है. लेकिन भारत पशुजन्य रोगों के नियंत्रण के कड़े नियम बनाकर इस मामले में अग्रणी बन सकता है.
कोविड संकट से निपटने के ममता बनर्जी के तरीके ने उनकी स्थिति को कमज़ोर किया है. उन्होंने अपने व्यक्तित्व पर एक आवेगी और चुनाव-प्रेरित नेता की छवि को हावी होने दिया है.
अगर दिल्ली के स्कूली लड़के इंस्टाग्राम पर निजी चैट्स में माइनर लड़कियों के साथ बलात्कार की योजना बनाते हैं, तो राजनीतिक दलों के आईटी सेल सार्वजनिक रूप से ट्विटर और फेसबुक पर महिलाओं को धमकी देते हैं.
हज़ारीबाग़ में बैठे किसी जोड़े की शादी का सेट, वेनिस का कोई आकर्षक चौक हो सकता है. मुज़फ्फ़रनगर में बैठे लोग कल्पना कर सकते हैं कि वो लेक कोमो के किनारे किसी विला पर हैं.
उद्धव ठाकरे एक ऐसे नेता के रूप में उभरकर सामने आए हैं, जो केंद्र सरकार और बीजेपी से उनके ही तौर-तरीकों से निपट रहे हैं. बीजेपी के दांव उद्धव पर काम नहीं आ रहे हैं.
आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि छह साल में पर्सनल लोन तीन गुना हो गए हैं और कर्ज़ चुकाने में चूक बढ़ी है; सोशल मीडिया से बनी लाइफस्टाइल को बनाए रखने के लिए मिडिल क्लास कर्ज़ ले रहा है, जबकि असली मज़दूरी आधी रह गई है.