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Saturday, 28 February, 2026
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मत-विमत

कबूतर पहले नहीं हैं, भारत और पाकिस्तान लंबे समय से हिरण और बंदरों को जासूसी के लिए भेजते रहे हैं

क्या दोनों मुल्कों को टिड्डी में एक आम दुश्मन मिल गया है? क्या टिड्डियां बड़े पैमाने पर तबाही के वो हथियार हैं जिन्हें अब तक छिपाकर रखा गया था? शायद अर्णब गोस्वामी को पता होगा.

सोनम वांगचुक की बात में दम है पर क्या भारत के पास चीन को आर्थिक चोट पहुंचा पाने की क्षमता है

अब समय आ गया है कि क्विट इंडिया पार्ट टू अपनाया जाए और मेड इन इंडिया की कोशिश की जाये. कोविड ने देश की जनता को स्वावलंबन का एक और मौका दिया है- क्या हम इसके लिए तैयार हैं?

वाजपेयी-नेहरू प्रकरण याद है? इसलिए चीन मुद्दे पर मोदी को आरोपों की सूली पर टांगने से कांग्रेस को बचना चाहिए

प्रधानमंत्री को आरोपों की सूली पर टांगना ठीक नहीं, चाहे वे ऐसे नरम बरताव के हकदार हों या नहीं क्योंकि अगर ऐसा ना किया गया तो दरअसल चोट हम सब पर साझे में पड़ेगी.

अदालतों की आलोचना को समझने के लिए, तुषार मेहता और हरीश साल्वे को रिफ्रेशर कोर्स की जरूरत है

मेहता का कुछ संस्थाओं को वर्गीकृत करना, कि वो ‘समानांतर सरकारें चला रही हैं’, अधीनस्थ न्यायपालिका को एक संदेश है. एससी को उन्हें रोकना चाहिए था.

अश्वेतों के लिए सहानूभूति जताने वाले सेलेब्रिटीज दलितों-आदिवासियों को लेकर मौन क्यों?

अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद ऊंची जाति के भारतीय जाग गए. लेकिन क्या हम उनकी भारत में जाति वर्चस्व खत्म करने की लड़ाई में दलितों के साथ शामिल होने की कल्पना कर सकते हैं?

कोविड के बाद मोदी-शाह अपने सबसे प्रिय मुद्दे पर वापस लौटेंगे वो है हिंदुत्व की गोली

अर्थव्यवस्था से लेकर स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाएं जब सब कुछ विफल हो जाएंगी, तब कट्टर हिंदुत्व चेहरे की तुलना में भाजपा के लिए बचने के लिए बड़ा मुद्दा क्या होगा?

कोविड प्रभावित दुनिया में आम होगा रोज़गार और व्यापार का नुक़सान, लेकिन भारत के लिए ये बस एक और तूफ़ान जैसा

आर्थिक गिरावट में विकासशील देशों पर ज़्यादा बुरा असर हो सकता है. लेकिन पीएम मोदी की अगुवाई की स्थिरता और लचीलापन, यक़ीनन हमें इस तूफान से निकालकर शांत पानी की ओर ले जाएगा.

भारतीय स्कूल कब खोले जाने चाहिए? इसका सही जवाब है: अभी नहीं

ऑनलाइन कक्षाएं माध्यमिक स्तर के लिए अच्छी साबित हो सकती हैं. छोटे बच्चों को शिक्षक के मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है और बड़ों को लैब और प्रोजेक्ट स्पेस की जरूरत होती है.

आपदाओं से निपटने के लिए जनसांख्यिकी आंकड़ों का होना जरूरी, कोरोना संकट ने इसकी जरूरत पर ध्यान दिलाया है

कोरोना काल ने जनसंख्या की वास्तविक भौगोलिक स्थिति की सटीक और केंद्रीकृत जानकारी नहीं होने से उपजी खामियों को उजागर किया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सही जनसांख्यिकी स्थिति को जाने बिना आकस्मिक विपदाओं से निपटना संभव हो पायेगा?

श्रमिक स्पेशल ट्रेनें सिर्फ गड़बड़झाला हैं, अच्छा हो पीयूष गोयल आरोप-प्रत्यारोप करना बंद करें

इमरजेंसी की तारीफ में कहा जाता था कि इसमें रेलगाड़ियां वक़्त पर चलने-पहुंचने लगी थीं, लेकिन आज लॉकडाउन के दौर में तो रेलगाड़ियां गायब हो रही हैं और यात्री शवों के रूप में अपने ठिकानों पर पहुंच रहे हैं .

मत-विमत

तालिबान, TTP और बलूच चुनौती: रणनीतिक भूल की कीमत, पाकिस्तान दो तरफ से घिरा

पाकिस्तान का सियासी नेतृत्व कमजोर और कमअक्ल दिखता है. उसकी कूटनीति पूरी तरह भारत-चीन-अमेरिका केंद्रित है और वह अफगानिस्तान को अपना गुलाम मानता रहा है.

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उप्र : बलिया में दो युवकों के पास से एक करोड़ 75 लाख रुपये की नकदी बरामद

चंदौली, 28 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में पं. दीनदयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन पर राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने जांच के...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.