ट्रंपियन कूटनीति से अपनी रक्षा करने के लिए सबसे पहले हमें अपने सत्तातंत्र के अंदर के विमर्श में जो विरोधाभास हैं उनका विश्लेषण करना होगा. आप तब से शुरू कर सकते हैं जब 2014 की गर्मियों में मोदी सत्तासीन हुए थे.
चूंकि, सभी गैर-एनडीए दल बिहार में ‘एसआईआर’ को रद्द करने की एकजुट होकर मांग कर रहे हैं इसलिए यह माना जा सकता है कि अपना वोट बैंक खोने का डर उन्हें सबसे ज्यादा है.
अकबर ने जो बातें दूसरों को सीखने के लिए कहीं, उन्हें खुद भी अपनी ज़िंदगी में अपनाया. हिंदू धर्म और इस्लाम के अलावा दूसरे धर्मों के प्रति उसका जो सम्मान था, वो सिर्फ उसकी राजनीति में नहीं, बल्कि उसकी अपनी आस्था और निजी व्यवहार में भी साफ दिखाई देता था.
लाल बहादुर शास्त्री द्वारा बनाई गई संथानम कमेटी की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि जो भ्रष्टाचार पहले सिर्फ निचले स्तर के अफसरों तक सीमित था, वह अब ऑल इंडिया सर्विसेज़ और राजनीतिक नेतृत्व तक पहुंच चुका है.
नरेंद्र मोदी जबकि प्रधानमंत्री पद पर लगातार सबसे लंबे समय तक बने रहने वाले दूसरे नेता बन गए हैं, हम यह देखने की कोशिश कर रहे हैं चार अहम मामलों में वे इंदिरा गांधी की तुलना में कैसे लगते हैं.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण चुनाव जीतने की संभावना बढ़ाने के लिए किया गया लगता है, लेकिन एक बड़ा कानूनी सवाल है: क्या इससे उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है?