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Wednesday, 25 March, 2026
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राहुल गांधी को अपनी राजनीति पर एक बुनियादी सवाल पूछना चाहिए

राहुल पीएम मोदी और उनकी पार्टी के बारे में नकारात्मक बातें बनाने पर ध्यान दे रहे हैं. उन्हें यह एहसास नहीं है कि पिछले दो दशकों से उनके विरोधियों ने भी उनके बारे में जो नकारात्मक छवि बनाई है, उसे भी उन्हें संबोधित करना होगा.

रण संवाद में आने वाले युद्ध पर ज़ोर दिया, हम तो आज के लिए भी ठीक से तैयार नहीं हैं

सशस्त्र बलों का बड़ा हिस्सा बीते कल की लड़ाइयों के लिए तैयार है, आज की लड़ाइयों के लिए उनकी क्षमता सीमित है और भविष्य की लड़ाइयों के लिए कोई औपचारिक योजना नहीं है.

Gen Z ने तो नेपाल में तख़्तापलट दिया, लेकिन भारत में ऐसा कभी क्यों नहीं हो सकेगा

किसी सरकार को सच में चलने और लंबे समय तक टिके रहने के लिए सिर्फ नेता, पार्टी या विचारधारा ही नहीं, बल्कि मजबूत और सक्रिय संस्थाएं भी चाहिए.

नेपाल में Gen Z प्रोटेस्ट पर भारत और चीन की प्रतिक्रिया में अहम फर्क क्यों नज़र आता है

चीन किसी भी कीमत पर अपने कम्युनिस्ट सहयोगी नेपाल को एकजुट रखना चाहता है. भारत को चिंता करनी चाहिए.

तमिलनाडु की राजनीति दरारों से त्रस्त हो रही है, विजय की ‘एंट्री’ से इसमें और मंथन हो सकता है

राज्य में संशयवादी, स्थापित तथा मजबूत दलों, और सियासतबाजी के कारण भारी उदासीनता का भाव हावी है.

क़तर ने निभाई दोहरी भूमिका—शांति दूत भी और कट्टरपंथियों का ठिकाना, अब छिपने की कोई जगह नहीं बची

दुनिया की व्यवस्था दबाव में डगमगा रही है, ऐसे में शांति बनाना अब पहले से भी ज़्यादा ख़तरनाक काम हो गया है.

भारत कैसे टिका रहा जबकि पड़ोसी देश नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान बार-बार बिखरते रहे

जो लोग कहते हैं कि भारत को हिंदू राष्ट्र होना चाहिए, उन्हें नेपाल को गौर से देखना चाहिए. वहां की आबादी भारी संख्या में हिंदू है, फिर भी इससे देश की स्थिरता पर कोई फर्क नहीं पड़ा.

आरएसएस शताब्दी वर्ष: सेवा से संघर्ष तक, सामाजिक संगठन और राष्ट्र निर्माण की कसौटी पर संघ

संघ की हिंदू और हिंदुत्व की अवधारणा सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक तत्वों का समावेशी संगम है. संघ मानता है कि हिंदुत्व कोई मत या पंथ नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना है.

भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और हिट-एंड-रन—कैसे Gen Z का गुस्सा नेपाल की सड़कों पर उमड़ पड़ा

ताजा घटनाक्रम यह गंभीर सबक सिखाता है कि युवा पीढ़ी की ताकत को कमतर न समझें, वह भविष्य को बूढ़ी जमात के मुकाबले बेहतर नज़र से देखती है. 1990 और 2006 के जन आंदोलन के बाद से नेपाल को धोखा दे चुके शासक वर्ग से वह बुरी तरह निराश हो चुकी है.

‘तेंदुए’ उमर खालिद के ही नहीं बल्कि आपकी जिंदगी के भी कुछ साल खा सकते हैं

यह सब केवल भारत में ही नहीं चल रहा है. दुनियाभर में जो लोग तानाशाही की अतिवादी कार्रवाइयों पर तालियां बजाते हैं वे पाते हैं कि बुलडोजर उनके दरवाजे पर भी आ पहुंचा है

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भूमि अधिग्रहण के मामले में मुआवजे, ब्याज की राशि वित्तीय बोझ की मात्रा पर निर्भर नहीं हो सकती:अदालत

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) उचित मुआवजे की संवैधानिक गारंटी को कमजोर नहीं किये जा सकने पर जोर देते हुए उच्चतम न्यायालय ने...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.