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Wednesday, 25 February, 2026
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इमरान खान के पाकिस्तान में आसिम बाजवा की डर्टी मनी रॉ की साजिश बन गई

सत्ता में आने से पहले इमरान खान नवाज शरीफ से कहते थे कि अपने निवेश की रसीदें दिखाएं. अब जब वह प्रधानमत्री बन गए हैं तो नियम बदल गए हैं.

भारत में एससी-एसटी के बीच उपश्रेणियां बनाने की जरूरत, सुप्रीम कोर्ट ने राह की एक बाधा दूर की

एक सवाल ये कि उपश्रेणियों को बनाने का आधार क्या हो? अगर कोई ठोस कसौटी तय नहीं होती तो फिर बात मनमाने की हो सकती है, कोई चाहे जिस जाति समूह को कोटे की किसी भी उपश्रेणी में मनमाने तरीके से रख दे.

पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते बनाने की नरेंद्र मोदी की पहल का क्या हुआ

पड़ोसी देशों के साथ खराब रिश्तों ने भारत की ‘नेवरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी पर सवालिया निशान लगा दिया है.

भारत ने ब्लैक टॉप पर कब्जा किया, हेलमेट चोटी भी नियंत्रण में- चीन अब 1962 की रणनीति अपना सकता है

छोटे-मोटे ऑपरेशन में कामयाबी से भारत को बहुत खुश नहीं होना चाहिए क्योंकि चीन इसका उस तरह जवाब नहीं देगा जिस तरह हम पिछले चार महीनों से उसे देते आ रहे हैं.

विश्व हिंदू परिषद का डराना बेकार है, भारत में ईसाई धर्म का कोई भविष्य नहीं है

आरएसएस और अनुषंगी संगठन राजनीतिक उद्देश्यों से या फिर अनजाने में ये समझ बैठे हैं कि ईसाई मिशनरियों की धर्म परिवर्तन कराने की बहुत बड़ी क्षमता है और उन्हें न रोका गया तो करोड़ों हिंदू ईसाई बन जाएंगे.

ट्रंप या बाइडेन– भारत के लिए कौन बेहतर है, इसका जवाब एक 14 वर्ष पुराने सपने में है

सीएए, कश्मीर और जलवायु परिवर्तन पर मुखर रहे डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बाइडेन का भारत संबंधी रुख डोनाल्ड ट्रंप से बिल्कुल अलग रहा है.

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अब निर्मला सीतारमण की जरूरत नहीं, मोदी को जयशंकर की तरह लेटरल एंट्री का सहारा लेना चाहिए

नरेंद्र मोदी और अमित शाह राजनीति के मामले में तो माहिर खिलाड़ी हैं लेकिन अर्थव्यवस्था को संभालने का गुर भलीभांति नहीं जानते जबकि यह उनकी राजनीति के लिए बेहद अहम है.

भारत में बड़े पैमाने पर जब एक साथ चुनाव हो सकते हैं तो उसी तरह कोविड टीकाकरण भी किया जा सकता है

कोविड-19 कोई खसरे की बीमारी नहीं है इसलिए व्यावहारिकता के नाम पर जो यथास्थितिवाद चल रहा है उससे मोदी सरकार को पल्ला झाड़ना चाहिए.

टीआरपी के लिए रिया चक्रवर्ती का टीवी ट्रायल दिखाता है कि ट्राई को क्यों ब्रॉडकास्टरों के आर्थिक रेगुलेशन को बंद कर देना चाहिए

अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में रेगुलेटर न तो टीवी चैनलों के आर्थिक नियम तय करने की प्रक्रिया में दखल देते हैं और न उनकी कीमतों की सीमाएं तय करते हैं. भारत में ‘ट्राई’ को भी यही करना चाहिए.

लद्दाख में भारत द्वारा गुप्त गुरिल्ला SFF फोर्स का उपयोग चीन को काबू करने की व्यापक रणनीति का संकेत देता है

चीन का भारत के अलावा 17 अन्य देशों के साथ सीमा विवाद है. फिर भारत को इंतज़ार किस बात का?

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एक वायरल बंदर, एक IKEA का प्लश टॉय और US सुप्रीम कोर्ट का फैसला: टैरिफ के बारे में क्या बताते हैं

पंच का अपने प्लश टॉय से लगाव उसके देश से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले आराम से है. इसी तरह, ग्राहक जियोपॉलिटिकल लेबल से ज्यादा भरोसे और डिजाइन को प्राथमिकता देते हैं.

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जामिया विश्वविद्यालय ने वायरल ‘निकाह’ नोटिस को फर्जी बताया, शिकायत दर्ज कराई

नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने मंगलवार को एक परिपत्र जारी कर सोशल मीडिया पर प्रसारित उस अधिसूचना का खंडन किया,...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.