एक सवाल ये कि उपश्रेणियों को बनाने का आधार क्या हो? अगर कोई ठोस कसौटी तय नहीं होती तो फिर बात मनमाने की हो सकती है, कोई चाहे जिस जाति समूह को कोटे की किसी भी उपश्रेणी में मनमाने तरीके से रख दे.
छोटे-मोटे ऑपरेशन में कामयाबी से भारत को बहुत खुश नहीं होना चाहिए क्योंकि चीन इसका उस तरह जवाब नहीं देगा जिस तरह हम पिछले चार महीनों से उसे देते आ रहे हैं.
आरएसएस और अनुषंगी संगठन राजनीतिक उद्देश्यों से या फिर अनजाने में ये समझ बैठे हैं कि ईसाई मिशनरियों की धर्म परिवर्तन कराने की बहुत बड़ी क्षमता है और उन्हें न रोका गया तो करोड़ों हिंदू ईसाई बन जाएंगे.
सीएए, कश्मीर और जलवायु परिवर्तन पर मुखर रहे डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बाइडेन का भारत संबंधी रुख डोनाल्ड ट्रंप से बिल्कुल अलग रहा है.
नरेंद्र मोदी और अमित शाह राजनीति के मामले में तो माहिर खिलाड़ी हैं लेकिन अर्थव्यवस्था को संभालने का गुर भलीभांति नहीं जानते जबकि यह उनकी राजनीति के लिए बेहद अहम है.
अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में रेगुलेटर न तो टीवी चैनलों के आर्थिक नियम तय करने की प्रक्रिया में दखल देते हैं और न उनकी कीमतों की सीमाएं तय करते हैं. भारत में ‘ट्राई’ को भी यही करना चाहिए.
पंच का अपने प्लश टॉय से लगाव उसके देश से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले आराम से है. इसी तरह, ग्राहक जियोपॉलिटिकल लेबल से ज्यादा भरोसे और डिजाइन को प्राथमिकता देते हैं.