पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के लिए, निर्वासन में जीने का मतलब शांतिपूर्ण जीवन नहीं होता. और करीमा बलोच की जैसी रहस्यमयी मौतें इस तकलीफ को और बढ़ा देती हैं.
चीन अपना राजनीतिक उद्देश्य हासिल करने के लिए सैनिकों को पीछे हटाने पर समझौता करना चाहेगा. भारत को सैनिकों को पीछे हटाने या तनाव घटाने की पहल पर सहमत होने की जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए.
कांग्रेस का पुनर्गठन बेहद जरूरी है, यह तो कोई भी बता देगा लेकिन असली सवाल यह है कि यह पुनर्गठन किसके नेतृत्व में हो, इसलिए उसे नेतृत्व परिवर्तन पर विचार करने में जुट जाना चाहिए.
लद्दाख़ में चीनी पीएलए के साथ भारतीय सेना के टकराव को, मुश्किल से ही ‘तटस्थ रहना’ कहा जा सकता है. लेकिन अमेरिकी अधिकारियों की निगाह में, इतना भर काफी नहीं है.
अपने विशिष्ट गर्वभाव के बावजूद, आज़ादी के बाद अलीगढ़ भारतीय मुसलमानों के लिए आधुनिकता और प्रगति की राह तैयार नहीं कर सका. प्रधानमंत्री मोदी का शताब्दी संबोधन एक बढ़िया मौका है.
कोरोनावायरस को जानबूझकर फैलाने की तोहमत लगाकर बदनाम किए गए तबलीगी जमात के सदस्यों को बरी करने के दिल्ली की अदालत के फैसले के आगे मैं एक मुसलमान होने के नाते नतमस्तक हूं.
बजरंग दल यूपी में ‘लव जिहाद’ के मुद्दे और इन आरोपों के कारण सुर्खियों में है कि फेसबुक ने अपने यहां आंतरिक स्तर पर इसे प्रतिबंधित करने की मांग उठने के बावजूद दूसरा रास्ता अपनाया.
किसी जमाने में दुनियाभर में प्रशंसित ‘टेक जायंट्स’ मानी गईं फेसबुक, अमेज़न, एप्पल, नेटफ्लिक्स और गूगल जैसी कंपनियों के समूह के प्रति दुनियाभर की सरकारों का नज़रिया बदला.
सरकार की अपनी NFHS, साथ ही कई वैश्विक गैर-वाम संस्थानों की रैंकिंग ने भारत के विकास संकेतकों में गिरावट दिखाई है. जिसका खामियाजा जल्दी ही भुगतना पड़ सकता है.
आज निरंतर बदलती विश्व व्यवस्था भारत के लिए एक मौका उपलब्ध करा रही है जिसका लाभ उठाने के लिए उसे खुद को अनुशासित रखना होगा ताकि पाकिस्तान जब अपने लिए मौका देख रहा है तब हम हड़बड़ी में कोई प्रतिक्रिया न कर बैठें.