पाकिस्तान के रूप में एक मुस्लिम देश, ‘अकारण’ आक्रामकता और चिरकालीन दुश्मनी का मिश्रण भाजपा के लिए एकदम मुफीद है. चीन इस खांचे में बिलकुल फिट नहीं बैठता है.
अगर विपक्षी दल इमरान ख़ान सरकार का चक्का जाम नहीं भी कर पाते तो भी पाकिस्तान के सेना प्रमुख क़मर बाजवा की राजनीतिक भूमिका उन्हें विपक्ष से बातचीत के लिए मजबूर करेगी जिससे वो नफरत करते हैं.
वर्षों तक उनकी तस्वीरें खींचते रहने के कारण मैं रामविलास पासवान को बहुत अच्छी तरह जानने लगा था और ये भी कि हाजीपुर का ये शख्स क्यों हर किसी का पसंदीदा मंत्री था.
2014 में केंद्र में नई ताकतवर सरकार बनी और अग्रवाल इंतजार करने लगे क्योंकि इस सरकार को खुद ‘गंगा ने बुलाया था.’ 2014, 2015, 2016, 2017 सिर्फ तारीख, नए वादे और नए दावों में बीत गए तब अग्रवाल ने प्रधानमंत्री को अपनी चार मांगे दोहराते हुए पत्र लिखे.
अर्थव्यवस्था का सिकुड़ना तब तक नहीं रुकेगा जब तक न्यूनतम स्तर पर हो रहा बदलाव बड़े स्तर पर परिलक्षित नहीं होने लगता. कोविड से पहले वाली स्थिति 2022 से पहले नहीं वापस आ सकेगी. फिर भी जुलाई-सितंबर के लिए कॉर्पोरेट नतीजे पिछली तिमाही के मुकाबले निश्चित ही सुधार दिखाएंगे.
खुद से ही लड़ता, कमजोर पड़ चुका मीडिया किसी भी सत्तातंत्र के लिए उसके मामले में दखल देने की आदर्श स्थिति बना देता है. हमारे पेशे की बागडोर थामने वालों ने आत्मघाती कदम उठा लिया है.
परी कथाओं की तरह ड्रैगन का जीवन भी सिर्फ जलाकर रख देने वाली उसकी अग्नि शक्ति नहीं है. उसकी भी कुछ कमजोरियां हो सकती हैं या वह भी बाकी सब की तरह ही हो सकता है.
रामविलास पासवान कुल 9 बार लोकसभा का चुनाव जीते (8 बार हाजीपुर से, 1 बार रोसड़ा से). उन्होंने लोकसभा का कुल 13 चुनाव लड़ा, हाजीपुर से कुल 10 बार लड़े जिसमें 8 बार जीते.
हिंदी मासिक 'विवेक' के साथ साक्षात्कार में आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि हमारे यहां सभी पंथों के साथ समान व्यवहार किया गया है जबकि पाकिस्तान ने अन्य मतावलंबियों को वे अधिकार नहीं दिए.
प्रवासी भारतीय सम्मेलन से लेकर कुंभ मेलों तक, भारत ने दिखाया है कि वह जटिल आयोजनों का प्रबंधन कर सकता है. इस क्षमता को बाद में उसके G20 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक मंच पर भी मजबूती मिली.