न केवल खुशबू सुंदर बल्कि भाजपा में शामिल अधिकांश नए सदस्य उन चार फैक्टर पर खरे नहीं उतरते हैं, जिन्होंने इसे संसद में दो सदस्यों वाली पार्टी से व्यावहारिक तौर पर बिना किसी प्रतिद्वंद्वी वाली सत्तारूढ़ पार्टी के मुकाम तक पहुंचाया है.
लफ़्फ़ाजियों और ‘पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशनों’ को भूल जाइए, यह समय चीन को उसकी ही चालबाजियों के मुताबिक जवाब देने का है जबकि हमारे पास उस पर हमले करने के कई मुद्दे उपलब्ध हैं.
एक सैन्य कमांडर के तौर पर मैं मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं को लेकर बहुत सतर्क रहा हूं जिनमें जांच जरूरी होती है. अगर फैसले में कोई गलती हो जाए तो उसे सुधारने के उपाय किए जाने की जरूरत होती है.
निजी क्लीनिकों और अस्पतालों पर भरोसा न होने के बावजूद लोग उसका खर्च उठा पाने की स्थिति में आते ही सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को छोड़ उसी की शरण लेते हैं लेकिन जरूरत इस प्रवृत्ति को उलटने की है.
आज भारत में जातीय चेतना एक अलग स्तर पर पहुंच चुकी है. हर बात पर नज़र रखी जा रही है. न सिर्फ भारत में बल्कि विश्व स्तर पर भी जाति की नई व्याख्याएं प्रस्तुत की जा रही हैं. क्या भविष्य में स्थितियां बदलेंगी?
किसान-आंदोलन पंजाब तक सीमित नहीं, वह पंजाब से बाहर भी फैल रहा है. ठीक-ठीक कहें तो सिरसा पंजाब के बार्डर पर है और वहां इस संदेश को बड़े साफ ढंग से पढ़ा जा सकता है.
भारत को क्वाड देशों की रणनीति में भी अपने हितों को सबसे ऊपर रखना होगा, क्योंकि इंडो-पैसिफिक में चीन से सबसे ज्यादा आमना-सामना इसी का होगा. किसी भी हालत में उसे यहां अमेरिका का मोहरा बनने से बचना होगा.
जनवरी 2016 में 7वें वेतन आयोग की सिफ़ारिशें लागू होने से पहले कर्मचारियों को साल में एक बार 7,500 रुपये तक के ‘फ़ेस्टिवल एडवांस’ की जो सुविधा मिलती थी उसे ही 10,000 रुपये करके सिर्फ़ मौजूदा वर्ष के लिए पुनर्जीवित किया गया है. इसकी किस्तें 10 महीने तक कर्मचारियों के वेतन से काटी जाएंगी.
प्रवासी भारतीय सम्मेलन से लेकर कुंभ मेलों तक, भारत ने दिखाया है कि वह जटिल आयोजनों का प्रबंधन कर सकता है. इस क्षमता को बाद में उसके G20 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक मंच पर भी मजबूती मिली.