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Monday, 26 January, 2026
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क्या गुजरात हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट भी महत्वपूर्ण मुकदमों की सुनवाई का सीधा प्रसारण कर पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी

देशवासियों को अभी भी मुकदमों की कार्यवाही के सीधे प्रसारण के बारे में उच्चतम न्यायालय के सितंबर 2018 के फैसले पर पूरी तरह अमल का इंतजार है.

मोदी की लॉकडाउन के दौरान बढ़ी दाढ़ी रहने वाली है, सियासी तौर पर अभी इसे बहुत कुछ हासिल करना है

मोदी धीरे-धीरे और लगातार अपने व्यक्तित्व को तराशते हुए खुद को कुछ सबसे महान राजनीतिक और दार्शनिक शख्सियतों के लुक्स से मिलाने की कोशिश कर रहे हैं.

बिहार चुनाव में दलित वोटर एक्स फैक्टर होंगे- वे यूपी की तरह वोट नहीं करते

व्यापक संदर्भों में यूपी में दलित चेतना को बसपा द्वारा आंबेडकरवादी राजनीति और आम व्यवहार शैली का हिस्सा बना दिया गया जबकि बिहार में यह मार्क्सवादी राजनीति और वर्ग संघर्ष के नारे के साथ आगे बढ़ी.

मुफ़्ती, अब्दुल्ला पर हमले करके BJP चुनावी बाजी भले मजबूत कर ले, कश्मीर में उन्हें हाशिये पर डालना जोखिम भरा साबित हो सकता है

मोदी और शाह कश्मीर में स्थानीय नेतृत्व के साथ सहयोग करने की अपनी नीति पर पुनर्विचार करें. कश्मीर के दल अपनी खोयी जमीन फिर हासिल करने की जद्दोजहद में जुटे है. उन्हें धकेलकर राजनीति के हाशिये पर पहुंचाने की कोशिश उन्हें अपनी साख बहाल करने के लिए उग्र रुख अपनाने पर मजबूर कर सकती है.

‘अर्थ में छिपा है अनर्थ’ जैसे 5 कारण जो गंगा को साफ नहीं होने देते

व्यावहारिक सरकारी परिभाषा में गंगा के अर्थ का मतलब बैक्टेरियोफाज, औषिधीय गुण, नैसर्गिक प्रवाह और इकोलॉजी नहीं, उनके अनुसार गंगा के अर्थ का मतलब होता है गंगा का अर्थशास्त्र.

क्या बिहार में सचमुच नीतीश कुमार का कोई वोट बैंक नहीं है

उस वोट बैंक पर खास नजर रखने की जरूरत है, जिसके हाथों में बिहार की सत्ता की चाभी है और राजनीतिक विश्लेषक उस वोट की गणना किए बगैर नीतीश की पार्टी को जनाधार विहीन करार देते रहे हैं.

SBI कार्ड्स के बुरे ऋणों का संदेश साफ है- खराब वित्तीय स्थिति की अंधेरी सुरंग और लंबी खिंचने वाली है

सरकारी बैंकों को पांच साल अंधेरी सुरंग में रहने के बाद रोशनी की किरण दिखने लगी थी लेकिन क्रेडिट कार्डों के मामले में बुरे ऋणों का बढ़ता अनुपात खतरे की घंटी है.

ट्रम्प या बाइडेन? भारत-अमेरिका के संबंध में इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि दोनों देशों के बीच रणनीतिक गलबहियां हैं

भारत और अमेरिका एक-दूसरे से गहरी गलबहियां कर चुके हैं, पुराने बहाने इतिहास में दफन कर दिए गए हैं और सर्वोपरि राष्ट्रहित ही रणनीतिक फैसले करवा रहा है.

आखिर कैसे भारत को पछाड़ कर बांग्लादेश दक्षिण एशिया का टाइगर बन रहा है

किसी भी देश के विकास के पथ पर अग्रसर होने के लिए राजनीतिक स्थिरता का होना ज़रूरी होता है. धार्मिक कट्टरता का बढ़ना राजनीतिक स्थिरतता की राह में एक रोड़ा होता है.

नई दिल्ली को ओली सरकार को चेतावनी देनी चाहिए, चीन को भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नेपाल का इस्तेमाल करने देना भारी पड़ेगा

नई दिल्ली को ऐसे अगले कदम उठाने की जरूरत है जिसके बारे में चीन और पाकिस्तान सिर्फ अनुमान लगाते रह जाएं.

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भारत दावोस जैसी बातचीत के लिए तैयार है, वैश्विक शासन को एक नए मेज़बान की ज़रूरत है

प्रवासी भारतीय सम्मेलन से लेकर कुंभ मेलों तक, भारत ने दिखाया है कि वह जटिल आयोजनों का प्रबंधन कर सकता है. इस क्षमता को बाद में उसके G20 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक मंच पर भी मजबूती मिली.

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पहलगाम हमले और बाढ़ के बावजूद पिछले साल जम्मू कश्मीर में 1.61 करोड़ पर्यटक आए: उपराज्यपाल

जम्मू, 26 जनवरी (भाषा) उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को कहा कि नवंबर 2025 तक जम्मू कश्मीर में 1.61 करोड़ पर्यटक आए। उन्होंने...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.