scorecardresearch
Thursday, 29 January, 2026
होममत-विमत

मत-विमत

ड्रोन ने अजरबैजान को जंग जिताई, भारत को सैन्य आधुनिकीकरण पर होशियारी से खर्च करना चाहिए

भारत ने हमेशा सैन्य ताकत पर ध्यान केंद्रित किया है. आर्मेनिया-अजरबैजान के संघर्ष से पता चलता है कि यह एक अच्छी रणनीतिक योजना क्यों नहीं है.

असदुद्दीन ओवैसी के उदय का हिंदुत्व की राजनीति को एक जमाने से इंतजार था

मुस्लिम एकजुट और एकमुश्त एक जगह वोट करें, ये विचार वैसा ही गर्हित है जैसा कि हिन्दुओं को एक वोटबैंक में तब्दील करने की कोशिश.

RCEP में शामिल न होकर मोदी ने सही फैसला किया था क्योंकि इससे दक्षिण पूर्व एशिया के देशों को ज्यादा फायदा नहीं होने वाला

अमेरिका विकल्प के रूप में नहीं उपलब्ध हो रहा इसलिए चीन के नेतृत्व वाली व्यापार व्यवस्था में शामिल होने का फैसला हताशा में आत्मघाती कदम उठा लेने जैसा ही होगा.

एकनाथ रानडे- RSS का ऐसा प्रचारक जिसने विवेकानंद शिला स्मारक के लिए सभी विचारधाराओं को एक कर दिया

विवेकानंद शिला स्मारक के निर्माता और विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के संस्थापक एकनाथ रानडे जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे, उन्होंने स्वामी विवेकानंद के स्मारक के लिए सब विचारधाराओं को भारतीयता के रंग में रंग दिया.

भारतीय उदारवादियों के पास RSS के अपने ब्रांड हिंदुत्व संवैधानिकता से मुकाबले की कोई रणनीति नहीं

हिंदुत्व के उदारवादी विरोधियों को अभी तक हिंदुत्व संवैधानिकता के राजनीतिक प्रभाव का एहसास नहीं हुआ है. वे अब तक भारतीय संविधान को एक स्व-व्याख्यात्मक राजनीतिक पाठ मानते हैं.

समस्या दिवाली पर पटाखे फोड़ने की नहीं, बल्कि इसे एक राष्ट्रीय और नैतिक मुद्दा बनाने की है

लागू नहीं किए जा सकने वाले आदेश, पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध और एक मॉडल के रूप में दिल्ली का इस्तेमाल, ये उपाय न तो दिवाली के समय, न उससे पहले और न उसके बाद कारगर साबित होते हैं.

मोदी की BJP और राहुल की कांग्रेस में एक समानता है- दोनों अपने सहयोगियों को विमुख कर रहीं

कांग्रेस अपने सहयोगी को तात्कालिक नुक़सान पहुंचा रही है, जबकि उन्हें लंबे समय के लिए काट रही है.

भारत की हिंदी पट्टी की सियासत में दक्षिण से आ रही एक चुनौती असदुद्दीन ओवैसी के रूप में

‘हैदराबाद के मोहल्ले के नेता’ को, अब ‘लगभग किंग-मेकर’ कहा जा रहा है. उसे हल्के में लेना विपक्ष को ही भारी पड़ेगा.

BJP स्थानीय मुद्दों के ऊपर वैचारिक मुद्दों को प्रमुखता देकर राज्यों में जीत हासिल करती है, बिहार इसका ताजा उदाहरण है

राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने भाजपा से वैचारिक संघर्ष से परहेज कर बिहार चुनाव के पहले चरण में करीब 70 प्रतिशत सीटों पर कब्जा किया. लेकिन तीसरे चरण में बाजी पलट गई.

नीतीश कुमार की धार कुंद जरूर पड़ी है लेकिन BJP को अभी से ही जश्न नहीं मनाना चाहिए

मोदी और अमित शाह से लेकर खुली जीप में सवार होकर आए जेपी नड्डा तक सभी पिछले सप्ताह बिहार में जीत का जश्न मनाने के लिए भाजपा मुख्यालय पहुंचे थे. क्या जदयू की बजाये भाजपा का वर्चस्व कायम होने का समय आ गया है?

मत-विमत

अजित पवार की मौत ने भारतीय राजनीति में एक और ‘क्या होता अगर’ वाली बहस छोड़ दी है

दीन दयाल उपाध्याय की हत्या और माधवराव सिंधिया के प्लेन क्रैश से लेकर गांधी परिवार की हत्याओं तक, राजनीति में जो कुछ भी होता है, उसका हिसाब-किताब से कम और किस्मत से ज़्यादा लेना-देना होता है.

वीडियो

राजनीति

देश

दिल्ली साहित्य महोत्सव: पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ और आचार्य प्रशांत सहित कई वक्ता शिरकत करेंगे

नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) पूर्व प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी. वाई. चंद्रचूड़, आध्यात्मिक विचारक आचार्य प्रशांत, पत्रकार-लेखक राहुल पंडिता, संस्कृतिकर्मी शालिनी पासी और उपन्यासकार...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.