अमेरिका विकल्प के रूप में नहीं उपलब्ध हो रहा इसलिए चीन के नेतृत्व वाली व्यापार व्यवस्था में शामिल होने का फैसला हताशा में आत्मघाती कदम उठा लेने जैसा ही होगा.
विवेकानंद शिला स्मारक के निर्माता और विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के संस्थापक एकनाथ रानडे जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे, उन्होंने स्वामी विवेकानंद के स्मारक के लिए सब विचारधाराओं को भारतीयता के रंग में रंग दिया.
हिंदुत्व के उदारवादी विरोधियों को अभी तक हिंदुत्व संवैधानिकता के राजनीतिक प्रभाव का एहसास नहीं हुआ है. वे अब तक भारतीय संविधान को एक स्व-व्याख्यात्मक राजनीतिक पाठ मानते हैं.
लागू नहीं किए जा सकने वाले आदेश, पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध और एक मॉडल के रूप में दिल्ली का इस्तेमाल, ये उपाय न तो दिवाली के समय, न उससे पहले और न उसके बाद कारगर साबित होते हैं.
राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने भाजपा से वैचारिक संघर्ष से परहेज कर बिहार चुनाव के पहले चरण में करीब 70 प्रतिशत सीटों पर कब्जा किया. लेकिन तीसरे चरण में बाजी पलट गई.
मोदी और अमित शाह से लेकर खुली जीप में सवार होकर आए जेपी नड्डा तक सभी पिछले सप्ताह बिहार में जीत का जश्न मनाने के लिए भाजपा मुख्यालय पहुंचे थे. क्या जदयू की बजाये भाजपा का वर्चस्व कायम होने का समय आ गया है?
दीन दयाल उपाध्याय की हत्या और माधवराव सिंधिया के प्लेन क्रैश से लेकर गांधी परिवार की हत्याओं तक, राजनीति में जो कुछ भी होता है, उसका हिसाब-किताब से कम और किस्मत से ज़्यादा लेना-देना होता है.
नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) पूर्व प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी. वाई. चंद्रचूड़, आध्यात्मिक विचारक आचार्य प्रशांत, पत्रकार-लेखक राहुल पंडिता, संस्कृतिकर्मी शालिनी पासी और उपन्यासकार...