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Wednesday, 22 April, 2026
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भारत का सबसे शक्तिशाली टैंक होने के बावजूद सेना का 118 अर्जुन टैंक का ऑर्डर आखिरी क्यों होगा

ब्रिटेन के चैलेंजर 2 का वजन 62.5 टन है, जबकि अर्जुन के नवीनतम संस्करण का वजन 68.5 टन है.

मोदी की दाढ़ी पर पाकिस्तानी ऐसे चर्चा कर रहे हैं जैसे यह कोई राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला हो

पाकिस्तान में किसी ने भी कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की कोविड हेयरस्टाइल या दाढ़ी पर चर्चा नहीं की होगी लेकिन ये बात भी है कि वो हमारे सबसे पसंदीदा पड़ोसी नहीं हैं.

मुझे 2021 के बंगाल चुनाव को लेकर चिंता है और ऐसी फिक्र आपको भी होनी चाहिए: योगेंद्र यादव

1972 का बंगाल चुनाव लोकतंत्र पर कलंक है. 2021 में इससे भी गंभीर आशंकाएं उभर रही हैं.

हिंदुत्व और राष्ट्रवाद से परे, एक चीज जो मोदी को सफल बनाती है वह है- उनकी योजनाओं की प्रभावी डिलीवरी

पीएम मोदी ने उज्ज्वला, आवास योजना और नल जल - जैसी कल्याणकारी योजनाओं की कल्पना की और फिर लाभार्थियों तक यह पहुंचे यह भी सुनिश्चित करने के आदेश दिए.

आखिर क्यों बाइडन का ‘अमेरिका इज़ बैक’ का नारा दुनिया की ‘चीन के प्रति चिंताओं’ के लिए अच्छा नहीं

जो बाइडन का 'अमेरिका इज़ बैक' का नारा दुनिया की 'चीन के प्रति चिंताओं' के लिए अच्छा नहीं है क्योंकि चीन के प्रति नरम रवैया ठीक नहीं.

CBI के ममता के परिवार तक पहुंचने के साथ ही BJP को बंगाल में वंशवाद का मनचाहा मुद्दा मिल गया है

कुछ साल पहल् जब सीबीआई जब कोलकाता के पुलिस प्रमुख राजीव कुमार के घर पहुंचीं थी तो ममता बीचबचाव के लिए वहां फौरन पहुंच गईं थी. अब अभिषेक बनर्जी को स्वयं के परिवार के बचाव में अकेले खड़ा रहना पड़ रहा है.

हर कोई मानता है कि कृषि सुधारों की ज़रूरत है, राजनीतिक गतिरोध को कैसे खत्म कर सकती है मोदी सरकार

चल रही बहस की उपेक्षा और कृषक समुदाय के भीतर बटवारे को हवा देने से कृषि में बेहद जरूरी सुधारों की जड़ें कटने के सिवाय कुछ हासिल नहीं होगा.

जब महुआ मोइत्रा बोलती हैं तो उनका बेबाक दोटूक अंदाज़ लोकसभा को ध्यान से सुनने पर मजबूर करता है

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ममता बनर्जी के शहरी संस्करण के समान हैं, जिन्हें आज के युवाओं की भाषा में बोलना आता है.

वाजपेयी और मोदी के दौर के बीच आरएसएस ने सीखे कई राजनीतिक सबक   

वाजपेयी सरकार के जमाने में आरएसएस अपनी वैचारिक दासी भाजपा पर पकड़ बनाए रखने को उतावला दिखता था, तो अब वह मोदी की राजनीतिक पूंजी का पूरा लाभ उठाने की फिराक में है.

कहां हैं भारत के समलैंगिक पैरेंट्स? बहुत से भारतीयों के लिए परिवार रखना कोई विकल्प ही नहीं है

भारतीयों से पूछिए कि उनके लिए सबसे ज़्यादा अहम क्या है, और संभावना है कि अधिकांश लोग कहेंगे मेरा परिवार. लेकिन बहुत अजीब बात है कि भारत जैसे देश में, जो परिवार को ब्रह्माण्ड के केंद्र में रखता है, कुछ भारतीयों को परिवार नसीब ही नहीं होता.

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पूर्वी दिल्ली के स्कूल में नशे के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया

नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी की अपराध शाखा के स्वापक रोधी कार्यबल ने 'नशा मुक्त दिल्ली अभियान' के तहत पूर्वी दिल्ली के...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.