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Thursday, 12 February, 2026
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किसानों का आंदोलन दिखाता है कि मोदी की राजनीति भारतीय मध्यवर्ग की दो जमातों के बीच फंस गई है

मोदी सरकार के कृषि सुधारों में वे सारी विशेषताएं और भावनाएं निहित हैं, जो मध्यवर्गीय आकांक्षाओं पर आधारित मोदी मार्का राजनीति से जुड़ी हैं लेकिन ऐसा लगता है कि वे जनता का मूड भांपने में चूक गए हैं.

पाकिस्तान के सेना प्रेम में अब चीनी धन की भी भूमिका है और शीघ्र ही इसके पीछे विधायी ताकत भी होगी

अमेरिका को पुनर्विचार करने की ज़रूरत है. चीनी पैसे पर मौज करती पाकिस्तानी सेना हर तरह से बुरी खबर है, चाहे मैंडरिन में कही जाए या पंजाबी या अंग्रेजी में.

मोदी और शाह को चुनाव जीतने में भले महारत हासिल हो, मगर उनका काम राजनाथ और गडकरी के बिना चल नहीं सकता

कृषि क़ानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों को शांत करने की मोदी सरकार की रणनीति पर्दे के पीछे से तैयार करने में जुटे हैं राजनाथ सिंह

भारत बंद- देश ऐसे संवैधानिक ‘ग्रे जोन’ में जा रहा है जहां सही और गलत का फैसला राजनीति करती है

कोई भी पक्ष संविधान का अक्षरश: पालन नहीं कर रहा है और भारत तेज़ी के साथ एक ऐसे नियम विहीन ज़ोन में दाखिल हो रहा है जहां कानून का नियम किसी भी चीज़ का मापदंड नहीं रह गया है.

इटली के महान विचारक मैकियावेली के ग्रंथ ‘द प्रिंस’ से राहुल गांधी के लिए पांच सबक

कांग्रेस के 23 नेताओं के समूह ‘जी-23’ की बगावत और अहमद पटेल के निधन के बाद राहुल गांधी निक्कोलो मैकियावेली के 16वीं सदी के ग्रंथ ‘द प्रिंस’ से राजनीति के कुछ सबक ले सकते हैं. 

स्मृति ईरानी के नक्शेकदम पर नहीं है कंगना रनौत बल्कि वो ‘दबंगई’ की राह पर चल रही हैं

कंगना रनौत, आप उन लोगों जैसा ही बन चुकी हैं जिनसे कि आप नफरत करती हैं. आत्मसंतुष्टि और आत्मश्लाघा से परिपूर्ण.

किसानों की समस्या कमाई है, कीमत नहीं, समाधान कारखाने लगाने में है

समाधान खेतों में नहीं मिलेगा, कारखानों में मिलेगा. अगर कृषि में कम लोग लगे होते तो उसमें लगे लोगों की प्रति व्यक्ति आय बढ़ जाती और किसानों को अपनी पैदावार की कीमत को लेकर चिंता कम हो जाती.

बीते 20 सालों में लोकसभा में भाजपा और कांग्रेस के पूछे गए सवालों में से मात्र 5% में किसानों का जिक्र

भविष्य के लिए, राजनीतिक दलों को इस केंद्रीय प्रश्न को संबोधित करने की आवश्यकता है कि किसानों के साथ एकजुटता का दावा करते वक्त वे किसका प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं, और वे इन किसानों के लिए क्या कुछ करने को तैयार हैं?

किसान आंदोलन मोदी सरकार की परीक्षा की घड़ी है. सौ टके का एक सवाल -थैचर या अन्ना किसकी राह पकड़ें ?

मोदी चाहें तो आर्थिक सुधारों से अपने कदम उसी तरह वापस खींच सकते है जिस तरह मनमोहन सिंह ने अन्ना आंदोलन के दबाव में खींचे थे, या फिर कृषि सुधारों को मारग्रेट थैचर जैसे साहस के साथ आगे बढ़ा सकते हैं; उनके फैसले पर ही देश की राजनीति की आगे की दिशा तय होगी.

मनमोहन सिंह ने अन्ना आंदोलन को समझने में भारी गलती की और यही गलती मोदी किसानों के मामले में दोहरा रहे हैं

किसानों का आंदोलन पंजाब भर तक सीमित नहीं, इसे सिर्फ एमएसपी से जोड़कर देखना या बिचौलियों का आंदोलन कहकर खारिज करना ठीक नहीं. किसानों की तकलीफ ज्यादा बड़ी और गहरी है

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हरियाणा, यूपी, तमिलनाडु और कर्नाटक के पुरुष गोवा को कैसे बदनाम कर रहे हैं

शायद भारतीय पुरुषों के व्यवहार पर सही तरह से नज़र रखने का एकमात्र तरीका यह है कि हर ट्रिप पर उनकी मां उनके साथ हों. अगर वे किसी अजनबी से मिलना चाहते हैं, तो उन्हें पहले मम्मी से पूछना चाहिए.

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एनएचआरसी ने कोयला खदान में 18 श्रमिकों की मौत पर मेघालय सरकार को नोटिस जारी किया

नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बुधवार को कहा कि इस महीने ईस्ट जयंतिया हिल्स के थांगस्काई इलाके में...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.