कोविड वैश्विक महामारी से पहले एमआरएनए टेक्नोलॉजी को किसी भी दवा या वैक्सीन में मंज़ूरी नहीं मिली थी. लेकिन हंगरी की बायोकेमिस्ट कैटलिन कारिको ने अपनी रिसर्च भी छोड़ी नहीं.
नागरिकता कानून पर अमित शाह के बयान के बाद एएमयू में मोदी के भाषण से यही संकेत मिलता है कि मुसलमानों को अलग-थलग करने की उग्र राजनीति के कारण अंतरराष्ट्रीय संबंधों और आंतरिक सुरक्षा पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों का सरकार को एहसास होने लगा है.
पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के लिए, निर्वासन में जीने का मतलब शांतिपूर्ण जीवन नहीं होता. और करीमा बलोच की जैसी रहस्यमयी मौतें इस तकलीफ को और बढ़ा देती हैं.
चीन अपना राजनीतिक उद्देश्य हासिल करने के लिए सैनिकों को पीछे हटाने पर समझौता करना चाहेगा. भारत को सैनिकों को पीछे हटाने या तनाव घटाने की पहल पर सहमत होने की जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए.
कांग्रेस का पुनर्गठन बेहद जरूरी है, यह तो कोई भी बता देगा लेकिन असली सवाल यह है कि यह पुनर्गठन किसके नेतृत्व में हो, इसलिए उसे नेतृत्व परिवर्तन पर विचार करने में जुट जाना चाहिए.
लद्दाख़ में चीनी पीएलए के साथ भारतीय सेना के टकराव को, मुश्किल से ही ‘तटस्थ रहना’ कहा जा सकता है. लेकिन अमेरिकी अधिकारियों की निगाह में, इतना भर काफी नहीं है.
अपने विशिष्ट गर्वभाव के बावजूद, आज़ादी के बाद अलीगढ़ भारतीय मुसलमानों के लिए आधुनिकता और प्रगति की राह तैयार नहीं कर सका. प्रधानमंत्री मोदी का शताब्दी संबोधन एक बढ़िया मौका है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण चुनाव जीतने की संभावना बढ़ाने के लिए किया गया लगता है, लेकिन एक बड़ा कानूनी सवाल है: क्या इससे उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है?