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Friday, 10 April, 2026
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आत्मबोधानंद और सरकार दोनों चाहते हैं कि बहती रहे गंगा, फिर क्यों जान दे रहे हैं संत

आत्मबोधानंद 27 साल के एक युवा ‘विकास विरोधी संत’ है. वे कंप्युटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं और पिछले कई सालों से हरिद्वार के मातृ सदन में रह रहे हैं.

जयशंकर पर मोदी सरकार की छवि खराब न होने देने की बड़ी जिम्मेदारी, किसी प्रकार का PR सच्चाई नहीं छुपा सकता

एस जयशंकर जानते होंगे कि इन दिनों भारत लोकतंत्र की हर रेटिंग में नीचे खिसका है और मानवाधिकारों के बाबत प्रकाशित रिपोर्टों में इस मोर्चे पर भारत की खस्ताहाली पर बड़ी चिंता जाहिर की गई है.

आइशी घोष और कन्हैया कुमार ने जो शुरुआत की है वो वामपंथी नेताओं को बहुत पहले ही करनी चाहिए थी

जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष का पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ने का फैसला भारत में वामपंथ के पतन की एक बुनियादी वजह में सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है.

हॉन्गकॉन्ग में ‘देशभक्त’ भरकर चीन एक नया मकाओ तैयार करना चाहता है

अगर अमेरिका और चीन के बीच तनाव उबलता रहा और पूरी तरह एक ‘शीत युद्ध’ में तब्दील हो गया, तो हॉन्गकॉन्ग दोनों शक्तियों के बीच प्रतिद्वंदिता का केंद्र बन जाएगा.

केरल में पिनरई विजयन के नेतृत्व वाली LDF की वापसी की संभावना से क्यों चिंता में है उदारवादी

केरल में एलडीएफ शासनकाल ने मुख्यमंत्री के आसपास कभी इस तरह का व्यक्तित्व नहीं गढ़ पाया है. विजयन के विरोधी तो उनकी तुलना मोदी से करने की हद तक पहुंच गए हैं.

पलानीस्वामी को जयललिता या MGR बनने की जरूरत नहीं, उन्हें पता है कि सत्ता में कैसे बने रहना है

एआईएडीएमके सरकार नहीं गिरी और उसने अपना कार्यकाल पूरा किया, जो पलानीसामी की स्वाभाविक राजनीतिक सूझबूझ और योग्यता की गवाही देता है.

क्या मोदी हिंदुओं के घाव भर पायें है? उपासना स्थल कानून के खिलाफ दायर PIL इसका जवाब तय करेगा

सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को उपासना स्थलों के कानून को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर अपनी अपनी राय रखने को कहा है.उसका जवाब भारत के परिदृष्य को बदल देगा.

फ्रीडम हाउस ने भारत को आंशिक रूप से स्वतंत्र बताया- कांशीराम ‘आजादी’ को कैसे देखते थे

कांशीराम की राजनीतिक सफलता ने भारत में लोकतंत्र और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति वंचित तबकों में एक गहरा विश्वास पैदा किया. ‘समता एवं स्वाभिमान के लिए’ के नाम से शुरू किए गए उनके सतत संघर्ष ने भारत में आज़ादी की नींव को और मज़बूत किया.

केजरीवाल का देशभक्ति बजट वो राजनीतिक विकल्प नहीं जिसकी भारत को जरूरत है

कई लोग कहेंगे कि इस मोदी युग में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर उनसे होड़ लेकर केजरीवाल राजनीति का सटीक खेल खेल रहे हैं. लेकिन मंदिर-मंदिर घूमते राहुल गांधी और चंडीपाठ करतीं ममता बनर्जी भी यही सब कर रही हैं, तो केजरीवाल कौन-सी नयी और स्मार्ट चाल चल रहे हैं?

कांशीराम का बहुजन आंदोलन सिर्फ राजनीतिक नहीं, सांस्कृतिक भी था

BSP की घटती हुई राजनीतिक शक्ति का मतलब ये नहीं है, कि बहुजन आंदोलन के लिए सब कुछ ख़त्म हो गया है. कांशीराम जयंती याद दिलाती है, कि जाति-विरोधी आंदोलन आम लोगों के बीच अभी भी जीवित है.

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अमित शाह बंगाल में भाजपा का ‘संकल्प पत्र’ जारी करेंगे

कोलकाता, 10 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का चुनावी घोषणापत्र...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.