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Tuesday, 13 January, 2026
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2021 आ गया और आज भी तरक्की की राह में भारत की ब्यूरोक्रेसी सबसे बड़ी बाधा है

कोविड ने भारतीय नौकरशाही का सबसे खराब चेहरा बेनकाब किया है, जो कागज़ी कार्रवाई को लोगों के जीवन से ऊपर रखती है.

भारत में कोविड-19 की दूसरी बड़ी लहर क्यों नहीं आएगी

पिछले अगस्त में, हमने अनुमान लगाया था कि भारत में कोविड-19 का महामारी वाला दौर फरवरी 2021 तक समाप्त हो जाएगा. ऐसा लगता है कि भविष्यवाणी वास्तविकता से अधिक दूर नहीं थी.

अमेरिकी रणनीति के बदलते तेवर, पाकिस्तान की जगह अब भारत को तरजीह

‘हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए अमेरिकी रणनीतिक ढांचा’ फ्रेमवर्क में एक पूरा चैप्टर भारत पर है. और उसमें कहा गया है कि केवल भारत ही बढ़ते चीन को काबू में ला सकता है

क्या हत्या, आत्महत्या और बलात्कार के मामलों में अपनी ‘लक्ष्मण रेखा’ लांघ रहा है मीडिया

मीडिया ट्रायल पर टिप्पणियों के बावजूद इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि कई सनसनीखेज मामलों में इसकी वजह से आरोपी को न्याय के कठघरे तक लाने में सफलता मिली है.

अर्णब गोस्वामी चिल कर सकते हैं, महात्मा सिंड्रोम के कारण कांग्रेस उन्हें घेरने नहीं जा रही

टीआरपी घोटाले में मुंबई पुलिस की ओर से पेश की गई अर्णब गोस्वामी की व्हाट्सएप चैट भले ही सबूत हो लेकिन विपक्षी दलों के लिए यह पर्याप्त नहीं है.

कब तक जान लेती रहेगी जहरीली शराब, कब जागेंगी सरकारें

महात्मा गांधी की कहा था कि शराब औषधि के रूप में भी त्याज्य है और इस कारण किसी भी जनकल्याणकारी सरकार के लिए उसके पूर्ण निषेध का कोई विकल्प नहीं हो सकता.

शाहनवाज़ हुसैन का बिहार में पुनर्वास BJP के मुस्लिम नेताओं के विकल्पों पर क्या संदेश देता है

हुसैन 'नीतीश को खत्म करने के अभियान' को वहां से आगे बढ़ा सकते हैं, भाजपा उन्हें नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में भी शामिल करा सकती है.

दुनिया के चीन के साथ बढ़ रहे हैं व्यापारिक रिश्ते, लेकिन भारत के पास है कुछ छोटे-मोटे समझौते

ऐसा लगता है चीन एक अहम व्यापार भागीदार के तौर पर, ख़ुद को स्थापित करने की स्थिति में है, तब जब बहुत से देश शी जिनपिंग प्रशासन के अंतर्गत चीन की बढ़ती आक्रामकता के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं.

निवेशकों के लिए कैसे UP बन रहा फेवरिट डेस्टिनेशन, 5 पी फॉर्मुला की है अहम भूमिका

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साढ़े तीन वर्षों में 5 पी यानि- पॉलिसी, पोटैंशियल, प्लानिंग, परफार्मेंस एवं परफेक्शन के स्तर पर काफी वैल्यू एडिशन किया है.

भारतीय यूनिकॉर्न अपने पैरों पर खड़ा हो रहा है, बड़े व्यवसायों और खुदरा निवेशकों के लिए इसके ये मायने हैं

यूनिकॉर्न कंपनियां सिर्फ वेंचर पूंजीपतियों की आंखों में ही चमक नहीं पैदा कर रही हैं, वास्तव में वे असली व्यवसायी भी बनती जा रही हैं.

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ईरान के विद्रोह ने क्यों बेनकाब की लिबरल राजनीति की उलझन

ईरान में हो रहे विद्रोह इतने बड़े हैं कि उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, लेकिन यह सवाल ज़रूर उठता है: इसमें इतना समय क्यों लगा?

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राजनीति

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पूर्व सांसद थॉमस कुथिरावट्टम का 80 वर्ष की आयु में निधन

अलप्पुझा (केरल), 13 जनवरी (भाषा) केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थॉमस कुथिरावट्टम का सोमवार शाम निधन हो गया। वह 80 वर्ष के थे। पार्टी...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.