केंद्र या असम की भाजपा सरकार ने हरेक व्यक्ति के जीवन को छूने की कोशिश की है, इससे मतदाताओं के साथ ‘केमिस्ट्री’ बनाने का मोदी–शाह का राजनीतिक सिद्धांत निराधार नहीं लगता फिर भी मोदी-शाह को चिंता करनी चाहिए क्योंकि चुनावी गणित सत्ताधारी दल के पक्ष में नहीं दिखता.
केजरीवाल जब तक मोदी पर हमला कर रहे थे तब तक तो भाजपा ने उन्हें कुछ नहीं किया क्योंकि वे ‘आम आदमी’ की बोली बोल रहे थे, लेकिन अब वह हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी रह सकती है.
बांग्लादेश विरोधी बयानबाजियां बंद कर और उनके लोगों को ‘घुसपैठिया’ करार देने से हमें बचना होगा. यह समय हमारे अपने लोगों की आर्थिक समृद्धि और भलाई के लिए उन्हें साथ लेकर चलने का है.
सार्स-सीओवी-2 वायरस फिर लौट आया है, और इसके कुछ वेरिएंट्स मूल वायरस से ज़्यादा संक्रामक हैं. 26 फरवरी के बाद से भारत में रोज़ाना मामले 258% बढ़े हैं, जबकि एक्टिव मामलों में 163% का इज़ाफा हुआ है.
प्रति व्यक्ति आय, वित्तीय घाटा, व्यापार संतुलन और रोजगार के इसके आंकड़े आज भारत के इन आंकड़ों से कहीं बेहतर हैं और इसे अब हेनरी किसिंजर के शब्दों में ‘बास्केट केस’ यानी नाउम्मीदी की मिशाल नहीं कहा जा सकता.
इस बार के चुनावों में मोदी-शाह जोड़ी के प्रचार अभियान में पाकिस्तानियों, बांग्लादेशियों, आतंकवादियों पर हमले नहीं हो रहे हैं तो ऐसा लगता है कि उन्हें घरेलू राजनीति और राष्ट्रीय रणनीतिक हितों के द्वेषपूर्ण घालमेल के खतरों का एहसास हो गया है.
HAL इंजीनियरों को विदेशों में और IITs तथा IIMs जैसे प्रमुख संस्थानों में प्रशिक्षण देने पर भारी निवेश करता है, लेकिन उनका पूरा और सही उपयोग नहीं हो पाता.