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Wednesday, 14 January, 2026
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जातीय चिंताएं अब असम में कोई मुद्दा नहीं रह गया, यही मोदी-शाह की जोड़ी ने राज्य में हासिल किया है

राज्य के मतदाता भी अब जातीय आग्रहों को भूल कर सड़क, विकास और धर्म तक के बारे में आम मतदाताओं की तरह बातें करने लगे हैं.

मोदी-शाह का कमेस्ट्री बनाम गणित का फॉर्मूला असम चुनाव में कितना खरा साबित होगा

केंद्र या असम की भाजपा सरकार ने हरेक व्यक्ति के जीवन को छूने की कोशिश की है, इससे मतदाताओं के साथ ‘केमिस्ट्री’ बनाने का मोदी–शाह का राजनीतिक सिद्धांत निराधार नहीं लगता फिर भी मोदी-शाह को चिंता करनी चाहिए क्योंकि चुनावी गणित सत्ताधारी दल के पक्ष में नहीं दिखता.

नीतीश कुमार बदल गए हैं, ऐसा लगता है जैसे बिहार में एक नया मुख्यमंत्री है

जो लोग अपनी युवावस्था में लोकतंत्र में विश्वास करते हैं, वे अक्सर उम्र के साथ अधिनायकवाद के समर्थकों में बदल जाते हैं. बिहार इसे देख रहा है.

हिंदुत्व का दामन थामने से केजरीवाल को कोई फायदा नहीं हुआ, यह विपक्ष के लिए एक सबक है

केजरीवाल जब तक मोदी पर हमला कर रहे थे तब तक तो भाजपा ने उन्हें कुछ नहीं किया क्योंकि वे ‘आम आदमी’ की बोली बोल रहे थे, लेकिन अब वह हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी रह सकती है.

बीते 50 सालों में भारत-बांग्लादेश ने कई मौके गंवा दिए, उसे ‘पूर्वी पाकिस्तान’ की तरह देखना हमें बंद करना होगा

बांग्लादेश विरोधी बयानबाजियां बंद कर और उनके लोगों को ‘घुसपैठिया’ करार देने से हमें बचना होगा. यह समय हमारे अपने लोगों की आर्थिक समृद्धि और भलाई के लिए उन्हें साथ लेकर चलने का है.

मजबूती के साथ लौटा है कोरोनावायरस, लेकिन अभी भी भारतीय नौकरशाही के रवैये में बदलाव नहीं

सार्स-सीओवी-2 वायरस फिर लौट आया है, और इसके कुछ वेरिएंट्स मूल वायरस से ज़्यादा संक्रामक हैं. 26 फरवरी के बाद से भारत में रोज़ाना मामले 258% बढ़े हैं, जबकि एक्टिव मामलों में 163% का इज़ाफा हुआ है.

बांग्लादेश के 50 साल- इसने कई मानकों पर कैसे भारत को पीछे छोड़ा और पाकिस्तान से अलग होने को सही साबित किया

प्रति व्यक्ति आय, वित्तीय घाटा, व्यापार संतुलन और रोजगार के इसके आंकड़े आज भारत के इन आंकड़ों से कहीं बेहतर हैं और इसे अब हेनरी किसिंजर के शब्दों में ‘बास्केट केस’ यानी नाउम्मीदी की मिशाल नहीं कहा जा सकता.

आखिरकार अब श्रीलंका पर PMO और भारतीय विदेश मंत्रालय फैसले ले रहा है, न कि तमिल पार्टियां

तमिलनाडु में आसन्न चुनावों के बावजूद भारत का यूएनएचसीआर में श्रीलंका के खिलाफ प्रस्ताव पर मतदान नहीं करना दर्शाता है कि स्थितियां बदल चुकी हैं.

मोदी-शाह के चुनावी प्रचार से पाकिस्तान, बांग्लादेश और आतंकवाद जैसे मुद्दे इस बार क्यों गायब हैं

इस बार के चुनावों में मोदी-शाह जोड़ी के प्रचार अभियान में पाकिस्तानियों, बांग्लादेशियों, आतंकवादियों पर हमले नहीं हो रहे हैं तो ऐसा लगता है कि उन्हें घरेलू राजनीति और राष्ट्रीय रणनीतिक हितों के द्वेषपूर्ण घालमेल के खतरों का एहसास हो गया है.

मोदी और इमरान-पाकिस्तानी सेना के बीच सहमति, शांति की संभावना को मनमोहन-वाजपेयी दौर के मुक़ाबले बढ़ाती है

भारत के साथ शांति के मुद्दे पर पाकिस्तान इस बार पीछे नहीं हटेगा, क्योंकि उसके पास पीछे हटने का विकल्प नहीं है.

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लगातार दूसरे दिन बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 245 अंक फिसला

मुंबई, 14 जनवरी (भाषा) वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ने के बीच आईटी और चुनिंदा बैंक शेयरों में बिकवाली से घरेलू शेयर बाजार बुधवार...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.