लद्दाख में सैन्य गतिरोध को बढ़ाकर पीएलए ने संकट को पश्चिमी क्षेत्र तक सीमित रखने की उम्मीद की थी लेकिन भारत की प्रतिक्रिया ने बीजिंग को चौंका दिया, जिसकी वजह से तनाव और बढ़ गया.
जी-7 के डिप्लोमेट्स अब भारत के सुप्रीम को ही बात को दोहरा रहे हैं कि आखिर क्यों मोदी सरकार ने फार्मा कंपनियों को अगर वैक्सीन बनाने की अनुमति नहीं दी तो एंटी-कोविड दवा बनाने की भी परमीशन नहीं दी.
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय का, आदित्यनाथ और रामदेव की किताबों को दर्शन शास्त्र के कोर्स में शामिल करना एक मामूली फैसला लगता है, लेकिन एक अकादमिक दार्शनिक के नाते, ये परेशान करने वाला है.
कांग्रेस पार्टी के लिए सबसे अच्छा अवसर है कि वो हिंदुत्व पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे. हिंदू राष्ट्रवाद के अलग-अलग रंगों से छेड़छाड़ जैसा कि कांग्रेस करती रहती है, बीजेपी को ही मज़बूत करेगी.
‘मोदी के मुक़ाबले कौन?’ यह सवाल ऐसा है जिससे महागठबंधन-वादी कतरा नहीं सकते. जब तक वे इस सवाल का जवाब नहीं खोज लेते तब तक महागठबंधन का विचार मोदी विरोधियों के लिए एक खामखयाली ही बना रहेगा.
बीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बजाय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जिसका मतलब है कि उनका विकास नामधारी साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण इस बार बहुत आगे जायेगा और आक्रामक रहेगा.
कोविड जैसी महामारी में बड़ी संख्या में मौतों को सामान्य मौतों से अलग वर्ग में रखा जाना चाहिए. इन्हेंहवाई हादसे या औद्योगिक हादसे में हुई मौतों के समान माना जा सकता है लेकिन वैसी ही मौतों में शुमार नहीं किया जा सकता.
जो लोग मेगा ऊर्जा पार्क के लिए या खदान के विस्तार के लिए या बड़े विद्युत केंद्रों के लिए बलपूर्वक जमीनें लेने का विरोध कर रहे हैं, उनसे सख्ती से निपटा जा रहा है. उन पर विकास विरोधी होने का लेबल लगाया जा रहा है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण चुनाव जीतने की संभावना बढ़ाने के लिए किया गया लगता है, लेकिन एक बड़ा कानूनी सवाल है: क्या इससे उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है?