फिलहाल लंच पर होने वाली ऐसी बैठकों की उपयोगिता कतिपय लोगों का अहं संतुष्ट करने, कुछ इवेंट मैनेजरों की झोली भरने और मीडिया के लिए मसाला पैदा करने तक ही सीमित है.
वैश्वीकरण के पारंपरिक तत्व अपना आकर्षण खो रहे हैं, देशों की सीमाओं में सीमित न रहने वाले जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद जैसे मसले देशों को करीब आने के लिए मजबूर कर रहे है.
तालिबान, कश्मीरी नेताओं से वार्ता और पाकिस्तान के प्रति गर्मजोशी मोदी सरकार की रणनीतिक अनिवार्यताएं हैं; एक ओर वह पूरब के मोर्चे पर अमेरिका को ‘क्वाड’ के सहयोगी के रूप में चाहे और दूसरी ओर पश्चिमी मोर्चे पर उनके मकसद के खिलाफ काम करे यह नहीं चल सकता.
क्या कोरोना की पहली लहर से निपटने के लिए अंधविश्वास का इसलिए सहारा लिया गया कि विज्ञान के डोमिनेंट डिस्कॉर्स से इतर किसी धर्म विशेष के अंधविश्वास की प्रथा को सेलिब्रेट किया जा सके?
एनसीईआरटी की राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तक की प्रस्तावना में इस किताब को 'भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता की निशानी' कहा गया है. आज जब प्रस्तावना के इस वाक्य को पढ़ता हूं तो सोच में पड़ जाता हूं.
माओ की सांस्कृतिक क्रांति ने चीनी युवाओं की शिक्षा को बाधित कर दिया था, लेकिन डेंग सिआओपिंग के सुधारों के कारण शिक्षित मंत्रियों के शामिल किये जाने की एक प्रवृत्ति शुरू हुई जो शी जिनपिंग के शासन काल में और विकसित हुई है.
तीसरा मोर्चा कई कारणों से एक कमजोर ढांचा लगता है. एक यह कि इसके मूल में है मोदी विरोधी भ्रामक-सी भावना. दूसरे, यह भूल जाता है कि एकमात्र सच्ची अखिल भारतीय पार्टी कांग्रेस को अलग रखना अव्यावहारिक है. तीसरे, वह मतदाताओं को उस स्थिरता से वंचित कर सकता है जो उसे इन दिनों हासिल थी.
भाजपा को हिंदुत्व की विचारधारा को मात्र सत्ता हासिल करने तक सीमित नहीं रखना चाहिए बल्कि हिंदुत्व जीवन दर्शन के सकारात्मक पहलू को आगे रखकर अपना राजनीतिक कार्यक्रम तय करना चाहिए.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण चुनाव जीतने की संभावना बढ़ाने के लिए किया गया लगता है, लेकिन एक बड़ा कानूनी सवाल है: क्या इससे उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है?