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Wednesday, 25 March, 2026
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नाज़ी युद्ध अपराधियों पर अब भी मुकदमा चल सकता है तो 1971 के नरसंहार के लिए पाकिस्तानियों पर क्यों नहीं

बांग्लादेश 1971 के नरसंहार और युद्ध अपराधों के लिए पाकिस्तानी फ़ौजियों पर मुकदमा चलाना चाहता रहा है मगर राजनीतिक हकीकतें उसे रोकती रही हैं, फिर भी इंसाफ तो किया ही जाना चाहिए.

जनरल बिपिन रावत के बाद एक सही सीडीएस का चयन करना मोदी के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्यों है

अगले सीडीएस के लिए एक कठित चुनौती ये भी है कि बिडिंग प्रक्रिया में उसे सरकार की तरफ से काम करना होगा और उसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि दोनों के बीच एक सीमा रेखा बनी रही.

वसीम रिज़वी का हिंदू बनना मुसलमान और ईसाई धर्मगुरुओं के लिए क्यों नहीं है चिंता का कारण

अगर आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद चाहता है कि भारत एक शुद्ध हिंदू राष्ट्र बने और दूसरे धर्म के लोग शुद्धिकरण करके हिंदू बन जाएं, तो उसे जाति की समस्या से जूझना होगा और जाति का विनाश करना होगा.

क्यों दुर्घटनाग्रस्त होते हैं विमान- कुन्नूर हादसे की जांच का भारतीय वायुसेना के VVIP ऑपरेशन पर पड़ेगा असर

स्विस चीज़ मॉडल कुन्नूर हेलीकॉप्टर हादसे को बेहतर ढंग से समझा सकता है जिसमें जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और 11 अन्य सैन्य कर्मियों ने जान गंवा दी है.

MSP की मांग पर हड़बड़ी में फैसला अराजकता और लंबे समय तक होने वाले नुकसान का कारण बन सकता है

एमएसपी की गारंटी देने का अर्थ होगा उगाही की एक योजना बनाना, कीमत में अंतर की भरपाई का विकल्प देना या इन दोनों को एक साथ लागू करना. इसका सरकार और बाजार पर क्या असर पड़ेगा?

नागालैंड में उग्रवाद जब चरम पर था तब मैं वहां तैनात था, और तब ‘AFSPA’ भी लागू नहीं था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नागा शांति समझौते पर दस्तखत तो हो गए मगर ‘आफ़स्पा’ अब भी वहां लागू है, और हम खुद को सबसे बड़ा लोकतंत्र कहते हैं!

भारत में सारी राजनीतिक चर्चा 2024 के इर्द-गिर्द घूम रही है लेकिन साल 2025 है उससे भी ज्यादा खास

मीडिया के साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की हाल की मुलाक़ात के तो कई मायने निकाले जा रहे हैं. मगर कुछ महीने पहले पुस्तक प्रकाशकों के साथ उनकी बातचीत पर कई लोगों ने ध्यान भी नहीं दिया.

अपनी जाति के ‘राजा-रानी’ की उभरती भावना के शक्ल में खड़ी हो रहीं है छोटी-छोटी पार्टियां

अपना दल, निषाद पार्टी और जन अधिकार पार्टी, उन आधा दर्जन छोटे सियासी खिलाड़ियों में हैं, जिन्होंने SP के साथ गठबंधन किया है.

अजित डोभाल गलत हैं; सिविल सोसाइटी से कोई खतरा नहीं है, हमने मेघालय में उग्रपंथियों को नाकाम किया

डोभाल सिविल सोसाइटी को युद्ध का अगला मोर्चा मानते हैं लेकिन ‘शिलंग वी केयर’ नाम के छोटे-से नागरिक संगठन ने उग्रपंथियों, और जबरन वसूली के चलन का डटकर मुक़ाबला किया

गठबंधन, ममता के साथ भारतीय राजनीति में फिर लौट आया है 90 का दशक, लेकिन ये केवल एक नक़ल है

लेकिन BJP-विरोधी या मोदी विरोधी होना ही, एक ‘न्यूनतम साझा कार्यक्रम’ का ताना बाना बुनने के लिए काफी नहीं होगा, जो 90 के दशक का एक और घिसा-पिटा वाक्य है.

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दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धि का उत्सव नहीं, जीवन में नई शुरुआत का प्रतीक: बागडे

जयपुर, 25 मार्च (भाषा) राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धि का उत्सव नहीं, बल्कि जीवन में नयी...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.