परमाणु हथियारों से लैस दो प्रतिद्वंद्वी देशों का इस तरह एक-दूसरे को “इतिहास और भूगोल” से मिटा डालने की बातें करना अविश्वसनीय और विचित्र है. परमाणु हथियारों से लैस देश सर्वनाश करने वाला पूर्ण निर्णायक युद्ध लड़ने की बात नहीं किया करते.
पाकिस्तान, चीन और अमेरिका को जो सबसे ज्यादा परेशान करता है, वह है दुनिया में भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था और आने वाले दस सालों में भारत के भू-राजनीति में तीसरे बड़े खिलाड़ी के रूप में उभरने की संभावना है.
टीएलपी पर कार्रवाई दिखाती है कि फील्ड मार्शल मुनीर एक नया रास्ता अपना रहे हैं. धार्मिक नेताओं को सहलाने की बजाय, वे धार्मिक दक्षिणपंथी आंदोलनों को कुचल रहे हैं जो देश की सत्ता को चुनौती देते हैं.
अगर हर प्रोजेक्ट को मापने योग्य नेट-ज़ीरो मानकों पर परखा जाए, तो भारत दुनिया को दिखा सकता है कि किसी देश की तरक्की को धरती की तरक्की से अलग नहीं होना चाहिए.
तालिबान गुट टीटीपी को एक वैचारिक सहयोगी के रूप में पोषित करते हैं, क्योंकि अमीर हिबतुल्लाह अखुंदजादा का शासन सीमावर्ती क्षेत्रों को पाकिस्तानी नहीं, बल्कि अफगानी मानता है.
ऐसा लगता है कि मोदी सरकार एक्स से खुद को अलग नहीं कर पा रही है. वह सोशल मीडिया पर बढ़ते गुस्से को बढ़ावा दे रही है और अपने ही बनाए राक्षस को चुपचाप और बड़ा कर रही है.
पंच का अपने प्लश टॉय से लगाव उसके देश से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले आराम से है. इसी तरह, ग्राहक जियोपॉलिटिकल लेबल से ज्यादा भरोसे और डिजाइन को प्राथमिकता देते हैं.