पाकिस्तान में सेना ही सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी है. भारत में उसे समझने वाला कोई महकमा है तो वह भारतीय सेना ही है. वही है जिसके साथ पाकिस्तानी फौज बैठेगी और जिसकी बात सुनेगी.
ईरान और सऊदी अरब अब बातचीत कर रहे हैं लेकिन जंग के जिन्न को वापस बोतल में बंद करने में शायद बहुत देर हो चुकी है. यमन में सत्ता के दलाल अपने दबदबे के लिए हिंसा पर ही निर्भर हैं.
देखना है कि जन-प्रतिनिधित्व कानून की धारा 61-ए के तहत ईवीएम के इस्तेमाल के बाद अब अचानक इस प्रावधान की संवैधानिकता के सवाल पर उच्चतम न्यायालय क्या रुख अपनाता है और अगर वह विचार करने का निश्चय करता है तो उसकी क्या व्यवस्था होगी.
गणतंत्र की प्राणवायु यानी विचार अब खर्च हो गए हैं. इक्कीसवीं सदी में गणतंत्र को बचाने के लिए बीसवीं सदी की विरासत का संयोजन और संशोधन करते हुए एक नई विचारधारा को गढ़ना होगा.
उग्र जातिवादियों के लिए ये तस्वीरें जाति की सर्वोच्चता के संकेत, तो उदार जातिवादियों को यह रक्षक होने एहसास देती हैं, जो उनमें नैतिक बड़प्पन का भाव जगाता है.
लोकतंत्र और गणतंत्र कमजोर ढांचे होते हैं जिन्हें निरंतर निगरानी और साज-संभाल की जरूरत होती है क्योंकि वे मामूली कुत्सित हस्तक्षेपों से भी आसानी से ध्वस्त हो सकते हैं.
ऐसा लगता है कि हथियारों के लिए आयात पर भारत की निर्भरता अभी बनी रहेगी, और यह अपनी सैन्य शक्ति को स्वरूप प्रदान करने की उसकी क्षमता को बाधित करती रहेगी.
इटैलियन आर्कियोलॉजिस्ट लॉरा गिउलियानो की क्यूरेशन भारत, पाकिस्तान, चीन, अफगानिस्तान, ईरान और इटली के आपस में जुड़े इतिहास को एक साथ लाती है, ऐसे समय में जब इस ज्ञान को जानबूझकर भुलाया जा रहा है.