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Friday, 27 March, 2026
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इंदिरा की तरह हैं मोदी- कांग्रेस को इतिहास से सबक लेना चाहिए, सोनिया और प्रशांत किशोर ला सकते हैं बदलाव

यह कहानी इंदिरा गांधी और उनके विरोधियों की है मगर इसमें पात्रों की भूमिकाएं उलट गई हैं, कॉंग्रेस पुरानी गलतियां कर रही है लेकिन अब उसमें बदलाव के कुछ संकेत दिख रहे हैं

दलित की दुर्दशा: प्रधानमंत्री के पांव पखारने से सवर्णों के पैर चटवाने तक

यह बात तो आईने की तरह साफ है कि इस दौरान दलितों के मानवाधिकारों की रक्षा के समुचित प्रयास किये गये होते तो उन्हें अपमानित करना और अत्याचारों का शिकार बनाना इतना आसान कतई नहीं होता.

चीन एक तो शंघाई में Covid पर काबू पाने में विफल है, अब वह आलोचना को सेंसर करने में जुटा है

शांघाई में सिर्फ कोविड -19 की महामारी के कारण लॉकडाउन नहीं लगाया गया है बल्कि इसके पीछे शांघाई और बीजिंग क्षेत्रों के बीच कुलीनतावादी राजनीति भी है.

यह बुलडोजर संविधान पर चल रहा है, गणतंत्र बचाने के लिए जन-गण को लामबंद करना होगा

मोदी सरकार ने संविधान का उल्लंघन करने का एक अनौपचारिक तरीका खोज लिया है. इस तरीके में आपको संविधान में लिखे शब्दों को बदलने की जरुरत नहीं होती- बस संविधान से छुटकारा पा लेना होता है

पेगासस आकर्षक है, लेकिन अच्छी जासूसी सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं है, भारत को सॉफ्टवेयर से ज्यादा कुछ चाहिए

वाकई में जो बातें बहुत महत्वपूर्ण होतीं हैं, उनके बारे में फोन पर चर्चा नहीं की जाती है. भारत को संस्थागत सुधारों की शुरुआत करनी चाहिए जो उसकी खुफिया सेवाओं की सबसे बड़ी जरूरत है.

भारतीय मुस्लिम समान नागरिक संहिता को बुरा नहीं मानते, केवल अशराफ को दिक्कत है

भारत की सभी राजनैतिक पार्टियों और सरकार को यह बात साफ साफ समझ लेनी चाहिए कि भारत में मुसलमान का मतलब देशज पसमांदा होता है, अशराफ नहीं, जब तक वो इस गलतफहमी में रहेगें तब तक वो अशराफ का भला करके इस मुगालते में रहेंगे कि वो पसमांदा का भला कर रहें हैं.

जहांगीरपुरी हो या खारगोन, देश ऐसी पुलिस का तो हकदार नहीं—जो दूसरी तरफ नज़र फेर ले

मुझे पता नहीं है कि कानून-व्यवस्था सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए है, जबकि बहुसंख्यक लगभग कुछ भी करके बच जा सकते हैं.

रूसी ‘मोस्कोवा’ के नष्ट होने के बाद क्या भारत को बड़े युद्धपोतों पर जोर देना चाहिए

‘मोस्कोवा’ जैसे विशाल विमानवाही युद्धपोतों को समुद्र में क्रूज मिसाइलों से भारी खतरा है मगर भारत को उनकी फिर भी जरूरत है.

क्या है प्रशांत किशोर का ‘4M’ प्लान? कांग्रेस को क्यों पार्टी में एक नड्डा की जरूरत है

कांग्रेस अगर 2024 में भाजपा को हराने का सपना देख रही है तो चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर की योजना के मुताबिक उसे अपना संदेश और संदेशवाहक चुनना होगा और गांधी कुनबे को दूसरों के लिए जगह बनानी पड़ेगी.

भारत में हिंदुत्ववादी हिंसा की जानबूझकर अनदेखी करना कहीं देश के लिए एक बड़ा खतरा न बन जाए

सड़क-छाप गैंग आम तौर पर छोटी-मोटी और निम्न स्तर की हिंसक घटनाओं के साथ एक राष्ट्रवादी हिंदू राष्ट्र के निर्माण की कोशिश में जुटे हैं. सांप्रदायिक हिंसा पहले भी होती रही है, लेकिन तब कम से कम संस्थाओं की सर्वोच्चता को चुनौती नहीं मिलती थी.

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ईस्टर पर जेईई (मेन) की परीक्षा देने में असमर्थ अभ्यर्थियों के लिए तिथि में बदलाव की अनुमति:गोपी

तिरुवनंतपुरम, 27 मार्च (भाषा) केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार ने ईस्टर रविवार के कारण संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई)...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.