Wednesday, 29 June, 2022
होममत-विमतचीन एक तो शंघाई में Covid पर काबू पाने में विफल है, अब वह आलोचना को सेंसर करने में जुटा है

चीन एक तो शंघाई में Covid पर काबू पाने में विफल है, अब वह आलोचना को सेंसर करने में जुटा है

शंघाई में सिर्फ कोविड -19 की महामारी के कारण लॉकडाउन नहीं लगाया गया है बल्कि इसके पीछे शंघाई और बीजिंग क्षेत्रों के बीच कुलीनतावादी राजनीति भी है.

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शंघाई ने चीन को अपनी ‘ज़ीरो कोविड’ रणनीति को सही साबित करने का आखिरी मौका दिया मगर ऐसा लगता है कि चीन नाकाम रहा है. इसका जिम्मेदार ठहराते हुए अभी किसी की छुट्टी तो नहीं की गई है लेकिन चीन शंघाई के स्थानीय अधिकारियों को इस नाकामी के लिए जिम्मेदार ठहरा सकता है. शंघाई से खाद्य सामग्री के लिए आवाज़ें उठ रही हैं उन्हें दबाना चीन के लिए मुश्किल साबित हो रहा है.

शंघाई में लॉकडाउन के दौरान सहायता की मांग करते जो हजारों संदेश और वीडियो आ रहे हैं उन्होंने सेंसर वालों के लिए मुसीबत बढ़ा दी है. वहां के लोगों ने सेंसरशिप से बचने के कई कल्पनाशील उपाय अपनाए हैं, जैसे महामारी की रोकथाम के उपायों के विरोधाभासों के बारे में अपने संक्षिप्त संदेशों के प्रसार के लिए वे ‘कुड़कुड़ाहट’ जैसे शब्द का प्रयोग कर रहे हैं.

संकेत और सोशल मीडिया

सेंसरशिप से बचने के लिए लोगों ने जिन चरित्रों का उपयोग किया है उनमें एक है ‘ली’, जो दो भिन्न तरह के चरित्रों का मेल है. सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले लोग पार्टी के झाओ लीजिआन सरीखे उन बड़े नेताओं को निशाना बनाने के लिए ‘ली’ का उपयोग करते रहे हैं, जो शंघाई के लोगों की मदद करने की जगह अमेरिका में मानवाधिकारों के रिकॉर्ड को लेकर उसकी आलोचना कर रहे हैं. ‘ली’ वाले चरित्र के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है और उसे झाओ लीजीआन से जोड़ने वाले सभी संदर्भों को निकाल दिया गया है. शंघाई में लॉकडाउन के कारण हुई एक आत्महत्या पर ‘वाइबो’ में अपना गुस्सा जाहीर करते हुए एक यूज़र ने लिखा— ‘यह भी अमेरिका में मानवाधिकार का ही एक मामला है, है न? देखिए, यह जनता के कितना हक़ में है!’

दूसरे यूज़रों ने झाओ पर इसलिए निशाना साधा है कि जब शंघाई में भूख से तड़प रहे हैं तब वे अमेरिका की आलोचना में लगे हैं. झाओ की टिप्पणियों का मज़ाक बनाते हुए ‘वाइबो’ पर एक यूज़र ने लिखा— ‘#अमेरिका के खिलाफ लीजिआन की गंभीर प्रतिक्रिया# अमेरिका रोज तलाश करवा रहा है, शंघाई में किराना की शॉपिंग का प्रदर्शन नहीं किया जाएगा. बाइडन ने ही मामले को खराब किया है, और अमेरिका ही सारे गलत काम कर रहा है.’ ‘वाइबो’ पर इस पोस्ट को सेंसर कर दिया गया.

झाओ पर हमले तब शुरू हुए जब उन्होंने शंघाई में महामारी को राजनीतिक मुद्दा बनाने के लिए अमेरिका को दोषी ठहराया. अमेरिकी विदेश विभाग ने घोषणा की थी कि वह उस शहर से अपने कुछ कर्मचारियों को बाहर निकाल लेगा. झाओ ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि ‘अमेरिका द्वारा अपने लोगों को निकाल ले जाने के राजनीतिकरण और उसके बहाने हमला करने की कोशिश पर हम गहरा असंतोष व्यक्त करते हैं.’

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बड़े नेताओं या अधिकारियों के बारे में ‘नकारात्मक’ बातों को हर दिन बुरी तरह सेंसर किस जाता है लेकिन इस बार लॉकडाउन को लेकर शंघाई के लोगों और सेंसर के बीच बिल्ली-चूहे का खेल चल रहा है. चीन की सरकारी मीडिया ने लोगों को भ्रमित करने के लिए झाओ के बयान के आधार पर अपनी कहानी गढ़ी. चीन ने शंघाई में खाद्य सामाग्री के अभाव और जनअसंतोष से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए अमेरिका पर दोषारोपण किया कि वह ‘अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को नष्ट’ कर रहा है. चीन की सरकारी मीडिया ने अमेरिका को ‘विश्व व्यवस्था का वोल्देमोर्ट’ बताते हुए कार्टून और लेख प्रकाशित किए. ‘चाइना डेली’ में एक शीर्षक छपा— ‘विश्व व्यवस्था का वोल्देमोर्ट, अमेरिका अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को नष्ट कर रहा ‘दानव’ है.’

चीनी सरकारी मीडिया यहीं नहीं रुका. मंगलवार को ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने एक ’खास खबर’ छापी जिसमें एक ऐसे गुप्त अमेरिकी साइबरवेपन का जिक्र किया गया है, जो दुनिया भर की गोपनीय बातों को चुरा सकता है. ‘ग्लोबल टाइम्स’ के अनुसार, ‘हनीकोंब’ नामक प्लेटफॉर्म साइबर नेटवर्कों को चकमा दे सकता है और जिस नेटवर्क को वह निशाना बनाना चाहता है उसके स्वरूप के मुताबिक अपनी आक्रमण नीति बदल लेता है. हैशटैग ‘सीआईए मेन बैटल साइबर अटैक वेपान एक्सपोजर’ मंगलवार से काफी चर्चा में आ गया और उसे मात्र एक घंटे में 3.9 करोड़ बार देखा गया.


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लॉकडाउन के पीछे कुलीनवादी राजनीति

शंघाई की स्थानीय सरकार ध्यान भटकाने की रणनीति के अलावा आलोचनाओं का जवाब देने की भी कोशिश कर रही है ताकि और ज्यादा नुकसान न हो. मंगलवार को उसने माना कि कोविड के कारण सात मौतें हुई हैं.

एक जांच से पता चला कि अधिकारी लोग मौतों की संख्या कम करके बता रहे हैं, और कुछ बुज़ुर्ग रोगियों की मौत को छिपा रहे हैं. 2020 की पहली लहर के बाद इन सात मौतों की पुष्टि मौतों को कबूलने का पहला उदाहरण है.

हैशटैग ‘शंघाई ऐड्स सेवेन लोकल देथ्स’ को वाइबो पर 55 करोड़ बार देखा गया. शंघाई के डिप्टी वाइस मेयर वू क्विंग ने महामारी, और कोविड की जांच के व्यवस्था के कारण लोगों को हो रही तकलीफ़ों के लिए माफी मांगी.

शंघाई में लॉकडाउन केवल कोविड-19 महामारी के कारण नहीं लगा बल्कि यह शंघाई और बीजिंग क्षेत्रों के बीच कुलीनवादी राजनीति का भी नतीजा है. शी जिनपिंग के ‘साझा खुशहाली’ अभियान शंघाई का शंघाई के उद्यमी क्षेत्र में कभी स्वागत नहीं किया गया, जहां व्यवसाय और राजनीतिक जगत के कुलीन ने इस अभियान पर असंतोष जाहीर किया है. इसलिए बीजिंग कुछ समय के लिए इस अभियान को रोक सकता है.

दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी ;क्योडो न्यूज़’ ने चीनी सूत्रों के हवाले से खबर दी कि ‘चीन ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के महत्वाकांक्षी अभियान ‘साझा खुशहाली को पूरी तरह से आगे बढ़ाना फिलहाल स्थगित करने का फैसला किया है. क्योंकि कोविड-19 के कारण आर्थिक सुस्ती आ गई है.’

शी ने हाल के सप्ताहों में अपने भाषणों में अपने इस अभियान का जिक्र कम कर दिया है. चीनी सोशल मीडिया पर शंघाई को लेकर शोर तेज हो जाने के कारण पिछले कुछ दिनों से शी ‘पीपुल्स डेली’ के पहले पन्ने पर कम नज़र आ रहे हैं. चीन के संकटमोचन माने जाने वाले लिउ हे को दखल देते हुए घोषणा करनी पड़ी कि सप्लाई चेनों को मजबूत करने की जरूरत है.

शंघाई में लॉकडाउन के कारण सप्लाई चेनों में आए भारी व्यवधान के मामले पर लुई हे ने सोमवार को कहा कि ‘औद्योगिक तथा सप्लाई चेनों को मजबूत करने पर ज़ोर देना जरूरी है. 1 ट्रिलियन युआन के फंड से तकनीकी विकास के लिए 200 अरब युआन का कर्ज उपलब्ध कराना; और ऑटोमोबाइल, एकीकृत सर्किटों, उपभोक्ता के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स, साजो-सामान के उत्पादन, और कृषि सामग्री, खाद्य सामग्री, दवाओं आदि के उत्पादन, और अन्य प्रमुख उद्योगों तथा विदेश व्यापार कंपनियों के लिए परिवहन तथा लॉजिस्टिक्स के निर्माण पर 100 अरब युआन उपलब्ध कराने की जरूरत है.’

बीजिंग बनाम शंघाई होड़ को पूरी दुनिया ने देखा. इस बार शंघाई के बहादुरों ने बीजिंग के सुस्त घोड़ों को चकमा दे दिया है.

(इस लेख को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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