विधानसभा अध्यक्ष पद पर सतीश महाना के सर्वसम्मत चुनाव के बाद मुख्यमंत्री व प्रतिपक्ष के नेता के बधाई भाषणों की कटाक्षों के तीरों से इब्तिदा के मद्देनज़र समझना कठिन नहीं है कि प्रदेश की राजनीति में आगे का मौसम कैसा होगा.
शिक्षा के भारतीयकरण के मसले पर बहसें इसी रीति से शुरु और खत्म होती हैं. कोई अपना अधकचरा प्रस्ताव लिए चला आता है और पेश कर देता है लेकिन प्रस्ताव कुछ यों निकलता है कि आपको ऊंची दुकान, फीके पकवान वाली मसल याद आ जाये.
अक्साई चीन पर कब्जे का सपना देखने की जगह भारत को एक स्पष्ट सोच अपनाने की जरूरत है कि वो कौन सी सीमाएं हैं जिनके लिए लड़ा जाना चाहिए और उन्हें बचाने के लिए किस चीज़ की जरूरत है.
मुस्लिमों पर उनकी यह तोहमत इस अर्थ में बेजा है कि इस भ्रांत धारणा पर आधारित है कि भाजपा को सत्ता से बेदखल करने की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा मुस्लिमों की ही है और इसे निभाने के लिए उन्हें हर हाल में ‘अतिरिक्त समझदारी’ प्रदर्शित करनी ही चाहिए!
मणिपुर में एनपीपी से लेकर असम में बीपीएफ और अब बिहार में वीआईपी तक भाजपा ने सहयोगी दलों को गंवाने का ट्रैक रिकॉर्ड बना रखा है. और उसे इसकी कोई खास परवाह भी नहीं है.
बीजेपी ने जिस तरह से लाभार्थियों के मामले को चुनाव प्रचार में प्राथमिकता दी, बल्कि जिस तरह से इन योजनाओं को चलाया और चुनाव से पहले इन्हें लागू किया, उससे ये तो पता चलता ही है कि वो इन योजनाओं को कितनी गंभीरता से लेती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से हम अपनी परीक्षाएं डिज़ाइन करते हैं, उससे कोचिंग उद्योग को फलने-फूलने का मौक़ा मिलता है; NEET, JEE और अन्य दाख़िला परीक्षाओं में यही हुआ है.