भाजपा के शीर्ष नेता जहां ‘योगी मॉडल’ (शासन का, विकास का नहीं) अपनाने में जुटे हैं, वहीं यूपी के मुख्यमंत्री का पूरा ध्यान गुजरात के ‘मोदी मॉडल’ पर केंद्रित है.
तमाम पहलुओं से देखें तो रूस को पूर्वी यूरोप में अगर एक बफर ज़ोन बनाने दिया जाता तो यह बेहतर और कम नुकसानदेह होता, शरणार्थियों की भारी समस्या से भी बचा जा सकता था.
दिल्ली का सैनिक फार्म कभी एक विशाल हरा-भरा इलाका था. इस पर सबसे पहले रिटायर्ड जनरलों की सेना की नजर पड़ी और देखते ही देखते राजधानी का ये कवच तोड़कर इसे पूरी तरह कब्जा लिया गया.
ऐसा लगता है कि भाजपा के वर्चस्व ने उसके प्रतिद्वंद्वियों के राजनीतिक कौशल और कल्पनाशीलता को खत्म कर दिया है. वे इस्लाम के नाम से भी डरने लगे हैं और मुसलमानों के साथ देते दिखना नहीं चाहते.
मुसलमानों के प्रति भारतीय शासन व्यवस्था उदार कभी नहीं रही. ऐसा भी नहीं है कि मुसलमानों के प्रति शासन का भेदभाव बीजेपी के सरकार में आने के बाद शुरू हुआ.