चीन की सुपर ग्रोथ की कहानी का उपसंहार मुमकिन है, जिसका फायदा भारत उठा सकता है लेकिन उसे समझना पड़ेगा कि व्यवस्थागत अव्यवस्था एक बड़ी हकीकत है जिसे कबूल करना ही पड़ेगा.
विश्व व्यवस्था बदल रही है और हर देश भारत को खुश करने में जुटा है जिसके कारण अब तक तो भारत के लिए अकल्पनीय आर्थिक, रणनीतिक और सैन्य संभावनाएं उभरती रही हैं, अब भारत के ऊपर है कि वह इनका कैसे लाभ उठाता है.
भारत में जलवायु परिवर्तन के कारण हो रही घटनाओं को अब ‘अप्रत्याशित’ नहीं कहा जा सकता है इसलिए सरकार को उनके लिए वैकल्पिक तरीकों के साथ तैयार होना पड़ेगा.
अगर ये मानकर चलें कि मुगलकालीन भारत के शासक ऐतिहासिक अन्याय के कर्ता थे तो फिर हम किस तर्क से ये बात कहेंगे कि आज जो हमें मुस्लिम नजर आते हैं वे मुगलकालीन मुस्लिम शासकों के वंशज हैं?
चीनी राज्य-व्यवस्था ज्यादा-से-ज्यादा अधिनायकवादी होती गई है, जिसके पीछे उस दर्शन का हाथ है जो सरकारी सत्ता हासिल करने, इनाम और सजा देने पर ज़ोर देता है.
अमेरिका अपने ताकतवर संसाधनों के जरिए पाकिस्तान को तालिबान की सीमा पार पनाहगाहों को बंद करवाने को मजबूर कर सकता था. उसने ऐसा नहीं किया और जीत गंवा बैठा.
भाजपा आलाकमान द्वारा किसी को मुख्यमंत्री बनाने या उस पद से हटाने के फैसले को लेकर किसी तुकबंदी और कारण की तलाश न करें. क्योंकि ऐसा कोई कारण होता ही नहीं है.