पाकिस्तानी हुक्मरानों ने एफएटीएफ प्रतिबंधों के खतरों से निपटने के लिए जेहादी मुहिम पर रोक जरूर लगा दी है लेकिन कश्मीर में उसके दूसरी पांत के कमांडरों की सक्रियता आसन्न खतरे से आगाह करती है.
लेकिन आज बड़ा सवाल इसके बदले यह है कि क्या राष्ट्रपति के, जिन्हें देश का प्रथम नागरिक माना जाता है और जिनके पद में देश की प्रभुसत्ता निहित होती है, चुनाव को भी ऐसे ओछे राजनीतिक मंसूबों व जिताऊ समीकरणों से जोड़ा जाना नैतिक है? और क्या इससे इस पद का गौरव बढ़ता है?
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मुख्यतः अपने सेवाकाल की अपनी उपलब्धियों पर किताबें लिखते हैं मगर आईएफएस अधिकारी विभिन्न मसलों और अपने कामकाज के संदर्भों और इतर विषयों पर भी किताबें लिखते हैं.
अपने दौर में स्वयं विश्वनाथ प्रताप सिंह भी कहा करते थे कि वे सामाजिक न्याय की अपनी पहलों को सेमीफाइनल तक ही पहुंचा पाये हैं और फाइनल होना बाकी रह गया है.
द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनना बीजेपी की कार्य योजना के तहत ही है. बीजेपी और आरएसएस की ये दो रणनीतियां मिलकर एक विशाल तंत्र बनाती हैं, जिनका संचालक एकीकृत रूप से एक हेडक्वार्टर करता है, जो दरअसल आरएसएस का हेडक्वार्टर है.
गृह मंत्रालय को अपना पारंपरिक रुख बदल कर रास्ता दिखाना होगा. यह ऐसी शर्त है जो राजनीतिक जिम्मेदारी है. अल्पावधि सेवा का अधिकतम उपयोग करना सेना की जिम्मेदारी है. दोनों को पूरा किया जा सकता है.
पश्चिमी लिबरलिज़्म अधिकारों से शुरू होता है और समाज को पीछे की ओर डिज़ाइन करता है. धर्म रिश्तों से शुरू होता है. यह मानता है कि आप ज़िम्मेदारियों के जाल में पैदा हुए हैं, और यह जाल एक तोहफ़ा है.