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Saturday, 7 March, 2026
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26/11 के मास्टरमाइंड साजिद मीर की सजा से लश्कर के आतंक का खतरा खत्म नहीं हुआ

पाकिस्तानी हुक्मरानों ने एफएटीएफ प्रतिबंधों के खतरों से निपटने के लिए जेहादी मुहिम पर रोक जरूर लगा दी है लेकिन कश्मीर में उसके दूसरी पांत के कमांडरों की सक्रियता आसन्न खतरे से आगाह करती है.

‘जिताऊ उम्मीदवारों’ की बीमारी के राष्ट्रपति चुनाव तक आ पहुंचने के मायने

लेकिन आज बड़ा सवाल इसके बदले यह है कि क्या राष्ट्रपति के, जिन्हें देश का प्रथम नागरिक माना जाता है और जिनके पद में देश की प्रभुसत्ता निहित होती है, चुनाव को भी ऐसे ओछे राजनीतिक मंसूबों व जिताऊ समीकरणों से जोड़ा जाना नैतिक है? और क्या इससे इस पद का गौरव बढ़ता है?

किताबें लिखने में IFS अफसरों ने IAS अफसरों से बाजी मारी

सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मुख्यतः अपने सेवाकाल की अपनी उपलब्धियों पर किताबें लिखते हैं मगर आईएफएस अधिकारी विभिन्न मसलों और अपने कामकाज के संदर्भों और इतर विषयों पर भी किताबें लिखते हैं.

विश्वनाथ प्रताप सिंह: ‘मैं एक ओर मुड़ा, बाकी वक्त के साथ चले गये’

अपने दौर में स्वयं विश्वनाथ प्रताप सिंह भी कहा करते थे कि वे सामाजिक न्याय की अपनी पहलों को सेमीफाइनल तक ही पहुंचा पाये हैं और फाइनल होना बाकी रह गया है.

JD(S), BSP, SP की तरह ही शिवसेना में राजनीतिक पतन देखने को मिल रहा है

इंदिरा गांधी के दौर में कांग्रेस की टूट की तरह ही शिवसेना भी नए नेता के तहत एकदम नई पार्टी की तरह उभर सकती है.

द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनना सावरकरवादी हिंदुत्व की जीत है

द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनना बीजेपी की कार्य योजना के तहत ही है. बीजेपी और आरएसएस की ये दो रणनीतियां मिलकर एक विशाल तंत्र बनाती हैं, जिनका संचालक एकीकृत रूप से एक हेडक्वार्टर करता है, जो दरअसल आरएसएस का हेडक्वार्टर है.

विधायक अब राजनीतिक उद्यमी बन गए हैं, महाराष्ट्र इसकी ताजा मिसाल है

आपके विधायक आपके अपने हैं यह मान कर मत चलिए, चुनावी जीत का राजनीतिक महत्व उनके लिए स्टार्ट-अप उद्यमी को मिले कर्ज के समान है.

मोदी जी की देन है लोजिक की बजाय मोजिक, यह अग्निपथ नहीं अज्ञानपथ है

अग्निपथ को लेकर चल रही मौजूदा बहस में मोजिक से काम लिया जा रहा है वैसे ही जैसे कि नोटबंदी, लॉकडाउन और 2020 के कृषि कानून के मामले में लिया गया था.

जाति जनगणना हिंदुओं तक सीमित न रखें- आदिवासी, मुस्लिम, सिख, ईसाई धर्म के दलितों को शामिल करें

रंगनाथ मिश्रा कमिटी और सच्चर कमिटी की रिपोर्टों के आधार पर मुस्लिम धर्मावलंबी दलितों और आदिवासीयों के दयनीय स्तिथि स्पष्ट है.

अग्निपथ की दिशा सही है लेकिन अमित शाह को राजी तो करवाए मोदी सरकार

गृह मंत्रालय को अपना पारंपरिक रुख बदल कर रास्ता दिखाना होगा. यह ऐसी शर्त है जो राजनीतिक जिम्मेदारी है. अल्पावधि सेवा का अधिकतम उपयोग करना सेना की जिम्मेदारी है. दोनों को पूरा किया जा सकता है.

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भारतीय उदारवादियों को धर्म के बारे में फिर से सोचने की जरूरत है. जड़ से कटा हुआ मॉडल असरदार नहीं है

पश्चिमी लिबरलिज़्म अधिकारों से शुरू होता है और समाज को पीछे की ओर डिज़ाइन करता है. धर्म रिश्तों से शुरू होता है. यह मानता है कि आप ज़िम्मेदारियों के जाल में पैदा हुए हैं, और यह जाल एक तोहफ़ा है.

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राजस्थान: वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ का निधन

जयपुर, सात मार्च (भाषा) वरिष्ठ पत्रकार एवं राजस्थान के पूर्व सूचना आयुक्त नारायण बारेठ (68) का निमोनिया के इलाज के दौरान दिल का दौरा...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.