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Tuesday, 31 March, 2026
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इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चल रहे भ्रष्टाचार पर रोक लगाने का समय आ गया है, सुप्रीम कोर्ट के पास मौका है

किसी ने यह नहीं सोचा होगा कि भाजपा सरकार चुनाव सुधार करने के अपने वादे पूरे करेगी लेकिन असली निराशा सुप्रीम कोर्ट से हुई है जिसने मामले को बहुत गरम मान कर इसे अगली-ज्यादा-बुद्धिमान-पीढ़ी के सुपुर्द करने जैसा फैसला किया

भारत जोड़ो यात्रा ने दक्षिणायन के द्वार खोले हैं, भविष्य के भारत के बीज दक्षिण में हैं

अगर हमें बहुसंख्यकवाद का विरोध करना है, तो हमें द्रविड़ राजनीति के तीन वैचारिक स्तंभों- क्षेत्रवाद, तर्कवाद और सामाजिक न्याय को नए तरीकों से अपनाना होगा.

राहुल गांधी की टी-शर्ट और नरेंद्र मोदी के सूट में नहीं, समस्या गांधी की धोती में है

महंगे कपड़े पहनने की अगर क्षमता है, जो भारतीय नेताओं में है, तो गांधी की तरह फकीरी का नाटक करना गलत है.

तानाशाही की बात पुरानी, हमारे जीवन, कला और मनोरंजन पर अपनी सोच थोप रही BJP सरकार

मध्यम वर्ग को लोकतंत्र और स्वतंत्रता की परवाह तो है - लेकिन केवल एक ख़ास सीमा तक.

नाज़ी जुड़ाव से KGB जासूस की सहायता तक, रानी एलिज़ाबेथ II ने परिवार को पहले रखा

रानी एलिज़ाबेथ और उनकी मां एलिज़ाबेथ बोवेस-लियोन ने कथित रूप से एक KGB जासूस को इस डर से संरक्षण दिया, कि वो एडवर्ड VIII के काले पारिवारिक रहस्यों को खोल देगा.

कैदियों को हुनरमंद बनाइए ताकि वे जेल से निकलने के बाद समाज में इज्जत से जुड़ सकें

विभिन्न अध्ययनों के आंकड़े यही बताते हैं कि जेल में बंद हजारों युवाओं को अगर समाज में सम्मानजनक तथा अपराध मुक्त जीवन जीने के लिए हुनरमंद नहीं बनाया गया तो वे अपराध की दुनिया की ओर मुड़ सकते हैं.

‘हम लोग’ के लल्लू की तरह भारतीयों के लिए राजभाषा समझ से परे, हिंदी दिवस मनाने से नहीं निकलेगा हल

ऐसा लगता है कि राजभाषा का अभी पूरी तरह से लोकतंत्रीकरण नहीं हुआ है. और, दुर्भाग्य यह कि शायद किसी को इसकी परवाह भी नहीं है.

उज्बेकिस्तान में मोदी-शी वार्ता के लिए चीन ने अपनी बंदूकों के मुंह झुका तो लिये लेकिन भारत मुगालते में न रहे

भारत-चीन के राजनीतिक तेवर कुछ भी रहे हों और चीनी ऐप्स पर रोक लगाने जैसे प्रतिबंधात्मक कदम क्यों न उठाए गए हों, हकीकत यह है कि चीन के साथ भारत के आर्थिक संबंधों का विस्तार ही हुआ है.

BJP के सांगठनिक पुनर्गठन में मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ मंत्र को मिला नया आयाम

सबके बीच स्वीकार्यता का दावा करना एक हद तक सही हो सकता है, लेकिन इस मामले में काफी कुछ काफी नेताओं की उपयोगिता और उनकी कथित निष्ठा भी निर्भर करता है.

हिंदी वाले क्यों चाहते हैं कि उनके बच्चे ‘हाय-बाय’ तो बोलें, मगर उनका चरण स्पर्श करना न भूलें

क्यों राजनीतिक विरोध के बावजूद हिंदी दक्षिण भारतीय राज्यों में धीरे-धीरे ही सही फैल रही है, लेकिन दक्षिण की भाषाओं में हिंदी भाषियों की रुचि कतई नहीं जाग रही.

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दिल्ली में बना अन्नाद्रमुक-भाजपा गठबंधन, जिसकी कोई गारंटी नहीं: उदयनिधि

तिरुवन्नमलई, 30 मार्च (भाषा) तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सोमवार को ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक)- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.