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Monday, 9 March, 2026
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मत-विमत

कैदियों को हुनरमंद बनाइए ताकि वे जेल से निकलने के बाद समाज में इज्जत से जुड़ सकें

विभिन्न अध्ययनों के आंकड़े यही बताते हैं कि जेल में बंद हजारों युवाओं को अगर समाज में सम्मानजनक तथा अपराध मुक्त जीवन जीने के लिए हुनरमंद नहीं बनाया गया तो वे अपराध की दुनिया की ओर मुड़ सकते हैं.

‘हम लोग’ के लल्लू की तरह भारतीयों के लिए राजभाषा समझ से परे, हिंदी दिवस मनाने से नहीं निकलेगा हल

ऐसा लगता है कि राजभाषा का अभी पूरी तरह से लोकतंत्रीकरण नहीं हुआ है. और, दुर्भाग्य यह कि शायद किसी को इसकी परवाह भी नहीं है.

उज्बेकिस्तान में मोदी-शी वार्ता के लिए चीन ने अपनी बंदूकों के मुंह झुका तो लिये लेकिन भारत मुगालते में न रहे

भारत-चीन के राजनीतिक तेवर कुछ भी रहे हों और चीनी ऐप्स पर रोक लगाने जैसे प्रतिबंधात्मक कदम क्यों न उठाए गए हों, हकीकत यह है कि चीन के साथ भारत के आर्थिक संबंधों का विस्तार ही हुआ है.

BJP के सांगठनिक पुनर्गठन में मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ मंत्र को मिला नया आयाम

सबके बीच स्वीकार्यता का दावा करना एक हद तक सही हो सकता है, लेकिन इस मामले में काफी कुछ काफी नेताओं की उपयोगिता और उनकी कथित निष्ठा भी निर्भर करता है.

हिंदी वाले क्यों चाहते हैं कि उनके बच्चे ‘हाय-बाय’ तो बोलें, मगर उनका चरण स्पर्श करना न भूलें

क्यों राजनीतिक विरोध के बावजूद हिंदी दक्षिण भारतीय राज्यों में धीरे-धीरे ही सही फैल रही है, लेकिन दक्षिण की भाषाओं में हिंदी भाषियों की रुचि कतई नहीं जाग रही.

1971 की जंग और क्यों बांग्लादेश और भारत के हित धर्मनिरपेक्षता में निहित हैं

मुजीबुर रहमान ने कहा था कि हमारी धर्मनिरपेक्षता धर्म के खिलाफ नहीं है. मुसलमान अपने धर्म का पालन कर सकते हैं. हिंदू भी अपने धर्म का. बौद्ध अपने धर्म का पालन करें. ईसाई अपने धर्म का. हमारी एकमात्र आपत्ति धर्म को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने को लेकर है.

क्यों समरकंद के लिए उड़ान भर रहे मोदी, LAC मुद्दे पर धीरे-धीरे लाइन पर आ रहे हैं शी जिनपिंग

एलएसी पर बने गतिरोध के दूसरे वर्ष भी जारी रहने के साथ ही मोदी का शिखर सम्मेलन से फिर से अनुपस्थित रहना शी जिनपिंग के चेहरे पर एक कूटनीतिक तमाचे जैसा होता.

हैदराबाद ‘मुक्ति’ दिवस मनाने का मोदी सरकार का फैसला पुराने जख्म ही कुरेदेगा

क्योंकि इसके पीछे मंशा तेलंगाना के 15 फीसदी मुसलमानों को उकसाने की दिखती है, इससे बेहतर तो है ‘एकीकरण’ दिवस मनाने का केसीआर का फैसला.

अशराफ कहते हैं कि इस्लाम में जातियां नहीं, फिर कुफू, खुतबा और फ़िरक़ा पर उनके विचार क्या कहते हैं?

इस्लाम दो तरह का है एक अशराफ का इस्लाम और दूसरा पसमांदा का इस्लाम. पसमांदा ऊंच नीच रहित मुहम्मद (स०) के सैद्धान्तिक इस्लाम की वकालत करता है वहीं अशराफ अपने द्वारा व्याखित इस्लाम को ही इस्लाम मानता है.

‘हीरे तो सस्ती चीज हैं’, इमरान खान तो सबसे ताकतवर संस्था का वर्चस्व तोड़ने का इरादा रखते हैं

पांच कैरेट के हीरे का मनहूस साया सिर्फ इमरान और बुशरा पर ही नहीं पड़ा है, बल्कि यह सर्वशक्तिमान जनरलों के प्रभुत्व पर भी ग्रहण बनकर मंडराने लगा है.

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ईरान का संघर्ष भारत तक पहुंचा, मुसलमानों से फिर देशभक्ति साबित करने की मांग

जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.

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ठाणे: मंदिर की दान पेटी चोरी, पुलिस जांच में जुटी

ठाणे, नौ मार्च (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे जिले में अज्ञात बदमाशों ने एक मंदिर में कथित तौर पर सेंध लगाई और लगभग 10,000 रुपये...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.