सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का मतलब बिलकुल साफ है: आरक्षण के सवाल पर न्यायापालिका का रुख पलट गया है और सामाजिक न्याय की लड़ाई का एक नया दौर शुरू हो गया है.
पिछले 50 वर्षों में हुए सम्मेलनों का रिकॉर्ड पर्यावरण के भविष्य को लेकर निराशा ही पैदा करने वाला है लेकिन लक्ष्य तय करने के लिए सम्मेलनों की ओर से दबाव न बने तो और भी कम काम होगा.
यह कबीर का देश है, विधिवत ढंग से पढ़े-लिखे व्यक्ति में भी अपेक्षित विवेक का अभाव हो सकता है, और एक गांव के अनपढ़ किसान में भी आपको कृषि की समझ के साथ-साथ प्रज्ञा का दर्शन हो सकता है.
अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह न करके रूस से कारोबार करने पर मजबूर भारत को अब, जी-20 जैसे समूहों का नेतृत्व करने और इंडो-पैसिफिक के विचार को आगे बढ़ाने की तैयारी करनी चाहिए.
भाजपा को अपने खिलाफ दो रुझानों का सामना करना पड़ रहा है, कांग्रेस अपने वोटरों को पक्का मान कर आपराधिक रूप से सुस्त है जबकि ‘आप’ खाली घड़े की तरह आवाज़ ज्यादा कर रही है.
नई परिभाषा के मुताबिक ईडब्ल्यूएस कैटेगरी का मतलब सिर्फ वो लोग हैं जो एससी, एसटी या ओबीसी नहीं है. यानी संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) में जिन वर्गों की बात है, वे ईडब्ल्यूएस नहीं हो सकते.
भारत के सरकारी और सॉवरेन बॉन्ड के विदेशी स्वामित्व में रिकॉर्ड कमी आई है. एफपीआई ने अपनी निवेश सीमा का 25% से कम सरकारी बॉन्ड में और केवल 17% कॉर्पोरेट बॉन्ड में लगाया है.