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Wednesday, 11 March, 2026
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सवर्ण मानसिकता से ग्रस्त EWS वाला फैसला कोर्ट के बदलते रुख का संकेत है, सामाजिक न्याय पर तीखे संघर्ष की आहट है

सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का मतलब बिलकुल साफ है: आरक्षण के सवाल पर न्यायापालिका का रुख पलट गया है और सामाजिक न्याय की लड़ाई का एक नया दौर शुरू हो गया है.

बातें ज्यादा, काम कम: COP27 जैसे जलवायु परिवर्तन के सम्मेलन थके-हारे ही साबित हुए हैं

पिछले 50 वर्षों में हुए सम्मेलनों का रिकॉर्ड पर्यावरण के भविष्य को लेकर निराशा ही पैदा करने वाला है लेकिन लक्ष्य तय करने के लिए सम्मेलनों की ओर से दबाव न बने तो और भी कम काम होगा.

EWS फैसले से जातिगत आरक्षण में मौलिक बदलाव, आने वाले वक्त में ‘सकारात्मक कार्यवाही’ को देगा नई शक्ल

एसएफएफए और ईडब्ल्यूएस के सन्दर्भ में पेश किये गए सवाल भिन्न संवैधानिक और कानूनी रूप बाले हैं, लेकिन एक तरह से समान राजनीतिक चिंताओं पर आधारित हैं.

तेजस्वी यादव को उनकी डिग्री से नहीं, उनके काम से पहचानिए

यह कबीर का देश है, विधिवत ढंग से पढ़े-लिखे व्यक्ति में भी अपेक्षित विवेक का अभाव हो सकता है, और एक गांव के अनपढ़ किसान में भी आपको कृषि की समझ के साथ-साथ प्रज्ञा का दर्शन हो सकता है.

‘हिंदी-रूसी भाई भाई’ के रिश्ते को मजबूत कर सकता है भारत, चीन से लेकर EU तक सभी संतुलन साधने में लगे

अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह न करके रूस से कारोबार करने पर मजबूर भारत को अब, जी-20 जैसे समूहों का नेतृत्व करने और इंडो-पैसिफिक के विचार को आगे बढ़ाने की तैयारी करनी चाहिए.

क्यों फौज जमीन पर कब्जा जमाने से ज्यादा राजनीतिक मकसद पूरा करने का जरिया है

पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एम.एम. नरवणे कहते हैं कि किसी भी युद्ध का अंतिम लक्ष्य जमीन पर अपना नियंत्रण कायम करना ही होता है, लेकिन सबसे अहम है राजनीति.

नेता जब आरक्षण को रेवड़ियों की तरह पेश कर रहे हों तब ‘EWS’ को आरक्षण देने से कैसे बचते

मंडल विरोधी आंदोलन में आत्मदाह करने वालों के साथ केवल मनुष्य नहीं बल्कि आदर्श और राजनीति की एकपूरी शैली आग की लपटों की भेंट चढ़ गई.

गुजराती वोटर BJP की ‘रिमोट कंट्रोल’ सरकार पर उठा रहे सवाल पर इससे AAP या कांग्रेस को नहीं होगा फायदा

भाजपा को अपने खिलाफ दो रुझानों का सामना करना पड़ रहा है, कांग्रेस अपने वोटरों को पक्का मान कर आपराधिक रूप से सुस्त है जबकि ‘आप’ खाली घड़े की तरह आवाज़ ज्यादा कर रही है.

EWS के बाद कोई नहीं होगा जनरल, हर जाति अब लाभार्थी, आरक्षण पर नहीं बनेंगे चुटकुले

नई परिभाषा के मुताबिक ईडब्ल्यूएस कैटेगरी का मतलब सिर्फ वो लोग हैं जो एससी, एसटी या ओबीसी नहीं है. यानी संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) में जिन वर्गों की बात है, वे ईडब्ल्यूएस नहीं हो सकते.

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय डेट फंड से क्यों कतरा रहे और कैसे अस्थिर हो गया है बॉन्ड मार्केट

भारत के सरकारी और सॉवरेन बॉन्ड के विदेशी स्वामित्व में रिकॉर्ड कमी आई है. एफपीआई ने अपनी निवेश सीमा का 25% से कम सरकारी बॉन्ड में और केवल 17% कॉर्पोरेट बॉन्ड में लगाया है.

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मुंबई: भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति हटाए जाने से नाराज व्यक्ति ने आत्मदाह का प्रयास किया

मुंबई, 11 मार्च (भाषा) पुलिस ने दक्षिण मुंबई में आत्मदाह का प्रयास करने वाले व्यक्ति के खिलाफ बुधवार को मुकदमा दर्ज किया है।...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.