अगर महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है, लेकिन राजनीतिक दलों का माहौल लागू होने वाले यौन उत्पीड़न विरोधी नियमों से बाहर रहता है, तो हम नई महिलाओं को असुरक्षित जगहों में भेज रहे होंगे.
भारतीय परंपरा हमारे जीवन में अनुशासन और नैतिक जिम्मेदारी बनाए रखती है. यह एक ऐसे संतुलित समाज की कल्पना करती है, जहां आध्यात्मिकता और आर्थिक समृद्धि एक साथ मौजूद हों और मानवता को उज्ज्वल व सामंजस्यपूर्ण भविष्य की ओर ले जाएं.
छात्रों के आंदोलन से निकली नेशनल सिटिज़न्स पार्टी अब पूरी तरह कलंकित हो चुकी है. उसने अब बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामवादी पार्टी जमात-ए-इस्लामी से हाथ मिला लिया है.
वही पुराना पैटर्न है: सनसनीखेज लीक से उन्मादी कवरेज होती है, मामले अदालत में गिर जाते हैं, लेकिन जनता की अदालत में आरोपियों को पहले ही दोषी ठहरा दिया जाता है.
हिंसा करने वाले लोग पुलिस से नहीं डरते. उन्हें पता है कि वे दूसरों को परेशान कर सकते हैं, दुकानों पर हमला कर सकते हैं या यहां तक कि हत्या भी कर सकते हैं और पकड़े नहीं जाएंगे.
हिंदुओं की हालत पर आरएसएस और भाजपा के इस मौन की तुलना डॉ. हेडगेवार की चिंताओं, वक्तव्यों से करें. तब साफ दिखाई पड़ेगा कि आरएसएस केवल अपने लाभ-हानि के हिसाब में डूबा रहा है.
ड्रोन आतंकवाद से निपटने की भारत की चुनौती सिर्फ तकनीक की नहीं, बल्कि सोच और संस्थाओं की भी है. असली समस्या यह है कि इसे हवाई सुरक्षा के लिए एक पूरी और गंभीर चुनौती के रूप में अब तक ठीक से पहचाना नहीं गया है.
रूस की क्रांति से भारत की राजनीति तक, कम्युनिज्म ने शोषण-मुक्त समाज का सपना दिखाया. सौ साल बाद वही विचारधारा क्यों बौद्धिक म्यूजियम की वस्तु बन चुकी है.