भारत ने नेपाल में राजशाही से लेकर माक्र्सवादी निजाम तक, हर राज के साथ कामयाबी रिश्ता बनाया है. चीन के साथ मिलकर दो कम्युनिस्ट नेताओं की ताजा पेशकश भी नई दिल्ली के लिए कुछ अलग नहीं होगी.
न्यूज़रूम की गरिमा बनाए रखने, तथ्यों के प्रति सम्मान बरतने और खबर को उसकी मूल अहमियत से ज्यादा न उछालने में कामयाबी से बड़ा संतोषप्रद शायद ही कुछ हो सकता है. इसी संतोष के साथ रॉय दंपती एनडीटीवी को नये हाथों में सौंपकर इससे विदाई ले सकता है.
पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिकाओं और लिव-इन पार्टनर नहीं, मां-बेटा और गुरु-शिष्य के संबंध भी रिसने लगे हैं और मामले केवल श्रद्धा जैसी युवतियों को मारकर उनके शरीर के 35 टुकड़े करने तक ही सीमित नहीं रह गए हैं.
केपी आली की अपने कम्युनिस्ट प्रतिद्वंद्वियों से हाथ मिला लेने से पड़ोस सदमे में, मगर पीएम मोदी उबरे और नेपाल के नए प्रधानमंत्री प्रचंड को बधाई देने वाले पहले अंतरराष्ट्रीय नेता बने.
कुमार रामेंद्र नारायण रॉय की 1909 में ‘मौत’ हो गई थी. हालांकि, लगभग एक दशक बाद रॉय होने का दावा करने वाला एक संन्यासी सामने आया, जिसने कहा कि उसकी पत्नी ने उसे जहर देकर मारने की साजिश रची थी. रॉय की ‘मौत’ अब भी रहस्य का विषय बनी हुई है.
चूचू टीवी की व्यापक विषय वस्तु केवल भारतीयों के लिए ही नहीं है. इसमें 12 चैनलों का नेटवर्क शामिल है, जिसमें अंग्रेजी से लेकर तमिल और फ्रेंच तक की भाषाएं हैं.