हमारे वक्त की विडम्बना देखिये: एक ऐसे समय में जब सेक्युलरवाद की राजनीति के लिए नये दोस्त बनाना बड़ा जरूरी हो उठा है, दरअसल हम तो दुश्मन बनाने की कला सीखने में जुट गये हैं.
भारतीय सेना में अभी भी जाति, धर्म और समुदाय के नाम वाली रेजिमेंट हैं, और भर्ती के दौरान जाति प्रमाण पत्र मांगती है. यह वास्तव में सबको साथ लेकर चलने वाली सेना बनाने का समय है.
आठ अप्रैल 1929 जब गोरों के हथकंडों से क्षुब्ध हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के दो जुझारू क्रांतिकारियों-भगत सिंह व बटुकेश्वर दत्त-ने दिल्ली की सेंट्रल असेम्बली में फेंका था बम.
पंजाब में आज परिवार के परिवार विदेश जा रहे हैं. कई गांवों में सिर्फ बच्चे और बुजुर्ग हैं, जो ग्रामीण इलाकों के पूरे सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करते हैं.
ये समझ से परे है कि मोदी की बीजेपी और सरकार में कुछ सियासी वंशजों की स्थिति मजबूत कैसे है. जबकि बाकियों की लगातार अनदेखी हुई है. हो सकता है अनुराग ठाकुर उन्हें एक दो टिप्स दे सकते हों.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.
आरोप है कि आरोपियों ने 2013 से 2017 के बीच PNB और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (जो अब PNB में विलय हो चुका है) के साथ धोखाधड़ी की, जिससे बैंकों को करीब 1,085.19 करोड़ रुपये का गलत नुकसान हुआ.