आठ वर्ष पहले भाजपा नेताओं ने भारत को 'कांग्रेस-मुक्त' करा देने की घोषणा की थी. वे भूल गये थे कि अति-निंदा और झूठी निन्दा का अंततः उल्टा फल भी मिलता है.
मणिपुर में हिंसा भी इसी तरह भुला दी जाएगी जैसे कोविड की दूसरी लहर गुज़र गई और हर कोई बीरेन सिंह की गलतियों को भी भूल जाएगा. ऐसा ही बीजेपी के रणनीतिकारों को लगता होगा, लेकिन वह गलत हैं.
बारिश का पानी अब उतना शुद्ध नहीं रहा जितना पहले हुआ करता था, क्योंकि हवा में उपस्थित प्रदूषक तत्व वर्षा की बूंदों के साथ मिल जाते हैं. बरसात का मौसम अपने साथ महामारी और एलर्जी का खतरा बढ़ा देता है.
भारत न अब सबसे तेजी से वृद्धि दर्ज कर रही अर्थव्यवस्था है, न ही उसे ‘चाइना प्लस वन’ वाले परिदृश्य में बड़ा लाभ मिल रहा है लेकिन मुद्रास्फीति, घाटे के प्रबंधन, विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये की स्थिरता के मामले में उसने अच्छा प्रदर्शन किया है.
धर्म और धर्म को मानने वाले लोगों के लोक व्यवहार के संबंध को देखा जाए तो ये तो स्पष्ट है कि हिंदू जिन धर्म ग्रंथों को मानते हैं उनमें जाति, जातिगत भेदभाव और छुआछूत है.
कांग्रेस ने अगर गलती की थी, तो भाजपा तो वहां असली बदलाव ला सकती थी लेकिन मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने हिंसा से पहले और उस दौरान जो बयान दिए उनसे भाजपा की वही विभाजनकारी नीति उभरी.
पिछले तीन वर्षों में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन घुसपैठ में वृद्धि हुई है. यह टिप्पणी इस नए खतरे की प्रकृति का वर्णन करती है और भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान द्वारा अब तक तैनात किए गए जवाबी उपायों की रूपरेखा तैयार करती है.