ट्विटर पर चीनी बॉट अकाउंट गलवान झड़प के बारे में गलत सूचना फैला रहे हैं और भारतीय सैनिकों को अपमानित कर रहे हैं. जब तक भारत जवाब नहीं देता, यह विश्वसनीय लगेगा.'
1975 में आपातकाल ने लोकतंत्र पर कैसे प्रहार किया था, एक ऐसा काला अध्याय जो भारत की पहचान को धूमिल करता है. देश की जनता को विशेषकर युवा पीढ़ी को उस दिन की समझ ज़रूर होनी चाहिए.
बढ़ती सैन्य और आर्थिक ताकत के कारण भारत अपनी विदेश नीति पर अडिग रह सकता है, रूस से तेल खरीदते हुए पश्चिम की अनदेखी कर सकता है और अंतरराष्ट्रीय क्लबों में जगह बना सकता है.
इस समझौते के शर्तों के तहत ईरान अपने अधिकांश परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने पर सहमत हुआ था और इसके बदले उसे आर्थिक प्रतिबंध से राहत देने का वादा किया गया था.
भारत में मुसलमानों के प्रति बरताव के मामले में मोदी पर अंगुली उठाकर ओबामा ने इस बहस में हस्तक्षेप किया. लेकिन तानाशाहों से हेलमेल रखते रहे अमेरिका का कोई राष्ट्रपति दूसरों को किस मुंह से उपदेश दे सकते हैं?
विदेश नीति और भारत के दूसरे देशों के साथ संबंधों को आम तौर पर पार्टी-पॉलिटिक्स से ऊपर होना चाहिए. लेकिन भारत की राजनीति फिलहाल जहां पहुंच गई है, वहां साझा राष्ट्रीय हित के सवालों पर भी आम सहमति नजर नहीं आती.
IAMC जैसे लोगों द्वारा प्रचारित आख्यान अक्सर चुनिंदा कहानियों पर निर्भर करते हैं, और यह चिंता का विषय है कि पश्चिमी मीडिया जमीनी हकीकत को जाने बिना उन्हें स्वीकार कर लेता है.
समान नागरिक संहिता के प्रस्ताव को फिर से लाने के पीछे बीजेपी का मकसद विपक्ष को अल्पसंख्यक समुदाय के रूढ़िपरस्त नेतृत्व के साथ दिखाना है और विपक्ष है कि इस जाल में फंसता जा रहा है.
जब मोदी और जो बाइडेन लोकतंत्र के और वैश्विक स्थिरता के नेता के रूप में एक-दूसरे की सराहना करेंगे, तो वे अर्थ और सार से रहित सुने-सुनाए औपचारिक वाक्यों को दोहरा रहे होंगे.
इंडिया आर्ट फेयर में सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाला आर्टवर्क किसी परिभाषा में नहीं बंधता—गिरजेश कुमार सिंह मलबे से निकाली गई ईंटों से लोगों और उनके बैग की मूर्तियां बनाते हैं. इस प्रदर्शनी का नाम 'हाल मुकाम' है.