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Monday, 9 February, 2026
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भारत मणिपुर सैनिक हत्यारों की तलाश में म्यांमार गया, अब, यह उन्हें जाने दे रहा है

मणिपुर में बढ़ती जातीय हिंसा और नागालैंड में रुकी हुई शांति प्रक्रिया को देखते हुए नई दिल्ली के सामने असंभव विकल्प मौजूद हैं.

UCC मोदी के लिए परमाणु बटन है, इसने राजनीति को हिंदू समर्थकों और मनमौजी मुस्लिमों के बीच बांट दिया है

वाजपेयी के नेतृत्व वाले बीजेपी को डर था कि अगर मुसलमानों को यह महसूस कराया गया कि उनकी धार्मिक मान्यताओं को निशाना बनाया जा रहा है तो भारत के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान होगा. मोदी को इस प्रकार की कोई चिंता नहीं है.

हुसैन ओबामा, मोदी UCC पिच, बकरीद बकरी-टीवी चैनलों की मुसलमानों के प्रति बेवजह की सनक

भारत के अखबार भारतीय टीवी समाचारों की तरह ‘मुसलमान’ के पीछे नहीं भागते और कहानियां कुछ भी हो सकती हैं जब तक कि मुसलमान शामिल हों और उनका नाम लिया जा सके.

अली सेठी, पसूरी इतने बड़े हैं कि अरिजीत सिंह इन्हें हासिल करने की कोशिश में छोटे लग रहे हैं

हिंदी फिल्मों में रीमेक क्षेत्रीय गानों को बड़े पैमाने पर दर्शकों तक पहुंचाते हैं, लेकिन इसका क्रेडिट बड़े बॉलीवुड गायक को मिलता है, मूल कलाकार को नहीं.

पीवी नरसिम्हा राव भारत के ऐसे PM जिसने सबसे ज्यादा अपमान झेला और जानबूझकर उन्हें गलत समझा गया

नरसिम्हा राव की कार्यशैली इतनी शालीन थी कि वे आत्म-निषेध की हद तक जाती थी, जिसे किसी राजनीतिक नेता का गुण नहीं माना जाता, लेकिन उनका तरीका मुकम्मिल और प्रभावी था.

मोदी ने अमेरिका के साथ रक्षा सौदे पर हस्ताक्षर कर दिए, अब DRDO और निजी क्षेत्रों को नतीजे देने होंगे

सरकार द्वारा सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को सक्षम किए बिना, मोदी और बाइडेन के बीच हस्ताक्षरित सौदे भारत की सैन्य शक्ति को मजबूत करने की उनकी क्षमता का अहसास नहीं करा पाएंगे.

राज्यपाल VS मुख्यमंत्री विवाद ने फिर असंभव को संभव कर दिखाया — सीपीआई (एम) और BJP को एकजुट कर दिया

यह सुनिश्चित करने के लिए कि राज्य के कानून संविधान के ढांचे के भीतर आते हैं, राज्यपाल को ‘विवेकाधीन शक्तियां’ दी जाती हैं, इसे अक्सर एक राजनीतिक टूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है.

2004 में वाजपेयी की हार मोदी के लिए एक चेतावनी होनी चाहिए, दुनिया में प्रशंसा से चुनाव नहीं जीते जाते

मेरा मानना है कि अच्छे माइक्रो आंकड़े और विदेशों में मिली प्रशंसा ही चिंता का कारण है. उससे 2004 में भी जीत नहीं मिली थी, उससे अभी भी जीत नहीं मिल सकती है.

भारत और अमेरिका का औपचारिक सहयोगी बनना एकजुटता नहीं है, बल्कि इससे दूर की बात है

एक औपचारिक संधि के वास्तव में नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं. वर्तमान का गले लगना, पीठ थपथपाना और ढेर सारे आर्थिक, वित्तीय और तकनीकी संबंध ठीक काम करते हैं.

पुतिन खुद को एक राजा के रूप में देखते हैं, वह पुरानी घातक गलतियों को दोहरा रहे हैं

यूक्रेन में पुतिन की विफलता युद्ध सामग्री की कमी, कमजोर नेतृत्व और सैनिकों के पलायन के कारण हुई. यह बिल्कुल प्रथम विश्व युद्ध के दौरान tsar की विफलता की तरह है जिसके बाद रूसी क्रांति हुई.

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‘हाल मुकाम’ में बेदखली: इंडिया आर्ट फेयर में मलबे से निकली लाल ईंटें और उनसे बनी एक बेचैन दुनिया

इंडिया आर्ट फेयर में सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाला आर्टवर्क किसी परिभाषा में नहीं बंधता—गिरजेश कुमार सिंह मलबे से निकाली गई ईंटों से लोगों और उनके बैग की मूर्तियां बनाते हैं. इस प्रदर्शनी का नाम 'हाल मुकाम' है.

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भदोही में दलित युवक की बेरहमी से पिटायी, एक आंख की रोशनी गंवायी

भदोही (उप्र), नौ फरवरी (भाषा) भदोही जिले में एक नहर के पास शौच करने को लेकर हुए विवाद में एक दलित युवक की बेरहमी...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.