भू-राजनीतिक टकराव और नये शीतयुद्ध ने तेल के बाजार, खाद्य तथा दूसरी सामग्री के बाज़ारों को उलट-पुलट दिया है. जलवायु परिवर्तन अलग तरह की कीमतें थोप रहा है. इसलिए, मांग भले कमजोर हो, कीमतें बढ़ेंगी.
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद का इतिहास और इजरायल के अनुभव यही सिखाते हैं कि आपकी सेना चाहे कितनी भी ताकतवर हो, राजनीतिक और रणनीतिक मकसद हासिल करने में वह शायद ही मददगार होती है.
यह मानने का कोई कारण नहीं है कि गाजा में किसी दूसरे प्रकार का युद्ध अधिक मानवीय हो सकता था. यह विचार कि युद्ध को कानून द्वारा सभ्य बनाया जा सकता है, ने हमारी कल्पना को शांत कर दिया है.
डीडीसीए में सुधार के लिए बिशन सिंह बेदी की लड़ाई को प्रशासकों के खिलाफ किया गया हमला व्यक्तिगत माना गया, जो एक गलत समझ का परिचायक है. हालांकि उनका हर काम दिल्ली क्रिकेट की बेहतरी जैसे एक बड़े उद्देश्य से प्रेरित था.
दो समाधान दिमाग में आते हैं: सरकार को अधिकारियों के लिए कार्यकाल और अवधि तय करनी चाहिए और उच्च पदों के लिए पैनल को गैर-विवेकाधीन, मैट्रिक्स-आधारित और पारदर्शी बनाना चाहिए.
नवाज़ शरीफ पर सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की पैनी नज़र रहेगी, जो सभी दलों से बातचीत कर रहे हैं और अगर शरीफ की बात नहीं बनी तो किसी और को सत्ता में लाने का विकल्प उनके पास रह सकता है.
अब जब चीन को बड़े दांव वाले युद्ध पर नज़र रखने में व्यस्त किया जा रहा है, यह छोटा पड़ोसी संघर्ष पाकिस्तान को भू-रणनीतिक युद्ध का ज़रूरी सबक सिखा सकता है.