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Wednesday, 4 March, 2026
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2024 के चुनावों से पहले अर्थव्यवस्था पर मोदी सरकार का बयान बदल रहा है. सब कुछ अच्छा ही अच्छा नहीं है

भारत दाल और भारत आटा के लॉन्च से पता चलता है कि सरकार लोगों को हो रही परेशानी से चिंतित है. उसके पास ऐक्शन लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.'

हमास के हमले ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मनुष्य आधारित खुफिया तंत्र की अहमियत उजागर की

टेक्नोलॉजी में प्रगति, एआइ, और ‘मशीन लर्निंग’ के बावजूद शत्रु के इरादों को भांपने में मनुष्य या संगठन पर आधारित खुफियागीरी की भूमिका प्रमुख बनी रहेगी.

रेड्डी, शर्मा, राघवन— व्हाइट हाउस के दिवाली समारोह से इस साल भी दलित गायब रहें

बाइडेन-हैरिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका दिवाली समारोह वास्तव में त्योहार की भावना को प्रतिबिंबित करे. यह न्याय और समता के बारे में है, केवल प्रतीकवाद के बारे में नहीं.

चुप चुप खड़े हो जरूर कोई बात है! बिहार में जातिगत गैर-बराबरी के आंकड़ों पर सन्नाटे के पीछे क्या बात है?

बात चाहे आर्थिक हालत की हो या फिर शिक्षा और रोजगार के अवसरों की — भारत में जाति ही इनको निर्धारित करने वाली धुरी बनी हुई है. जातिगत गैर-बराबरी की सच्चाई को समझने के लिए बिहार की ही तरह पूरे देश को एमआरआई की जरूरत है.

अफगान शरणार्थियों के निष्कासन में आतंक का समाधान ढूंढ रहा पाकिस्तान लेकिन स्थिति इससे और बदतर होगी

1973 में आईएसआई द्वारा बोए गए युद्ध के बीज की लंबी, कड़वी फसल हुई है, जिससे अब पाकिस्तान पर ही खतरा मंडराने लगा है.

इस दीवाली सीज़न में दिन में एक बार हेल्दी खाना खाएं, त्वचा की देखभाल इसकी भरपाई नहीं कर पाएगी

कोशिश करें कि बड़ी पार्टियों या बड़े इवेंट जब होने वाले हों तो उस वक्त कोई नया ट्रीटमेंट न लें. चीजें बहुत खराब हो जाने पर मैनेज करना कठिन है.

बड़ी कंपनियों का वर्चस्व बढ़ रहा है मगर लाभ छोटी कंपनियां कमा रही हैं

हाल के वर्षों में शेयर बाजार में सर्वश्रेष्ठ लाभ ‘लार्ज-कैप’ वाले शेयरों से नहीं ‘मिड-कैप’ और ‘स्माल-कैप’ वाली कंपनियों से मिला, जिनमें से कई को तो नाम से तुरंत पहचाना भी नहीं जाता.

दो अरब के उम्मा से कहीं बड़ा है अपना मुल्क, यह नहीं समझते मुसलमान इसलिए कमजोर हैं  

जब ऐसा लग रहा था कि मध्य-पूर्व अमन की गहरी नींद में सोने लगा है, तभी वहां फिर से आग सुलगाकर हमास ने वहां के कई विरोधाभासों और इस्लामी दुनिया से जुड़े सवालों को उभार दिया है

AMU में 1947 तक छात्रों के अशरफ होने का प्रमाण पत्र मांगा जाता था. अभी भी कुछ नहीं बदला है

1857 के विद्रोह के लिए 'निचली' जाति के अंसारी लोगों को दोषी ठहराने से लेकर उन्हें AMU में प्रवेश न देने तक, यूनिवर्सिटी के संस्थापक सैयद अहमद खान ने कई मौकों पर पसमांदाओं के साथ भेदभाव किया है.

राहुल गांधी ने अपना काम कर लिया है, लेकिन क्या यह पर्याप्त है? लोग मोदी को अभी भी अजेय मानते हैं

यहां तक ​​कि जो लोग यह घोषणा करते हैं कि विधानसभा चुनावों के इस दौर में बीजेपी अधिकांश राज्यों को हार जाएगी, वे भी इस बात से आश्वस्त हैं कि नरेंद्र मोदी लोकसभा में एक और कार्यकाल के लिए वापस आएंगे.

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सेना ने नियंत्रण रेखा पर संदिग्ध आतंकवादियों पर गोलीबारी की

राजौरी/जम्मू, चार मार्च (भाषा) भारतीय सेना ने मंगलवार तड़के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार करने की कोशिश कर रहे संदिग्ध आतंकवादियों पर...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.