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Friday, 6 February, 2026
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मोदी इंदिरा गांधी की नीतियों पर चल रहे हैं — चुनावों में जीत व्यक्तिगत है, CM कोई मायने नहीं रखते

भारत के लिए मोदी का करिश्मा और दूरदर्शिता ही चुनाव के लिए एकमात्र जनादेश है. स्थानीय नेता सुविधाप्रदाता से ज्यादा कुछ बन नहीं पाते. उनके नाम पर वोट जीतने की उम्मीद नहीं की जाती है.

टीवी पर म्यूज़िकल चेयर खेलते न्यूज़ एंकर हमें एक असल पहचान का संकट दे रहे हैं

कई एंकर और जाने-माने टीवी समाचार रिपोर्टर अब वहां नहीं हैं जहां उन्हें होना चाहिए था — उन्होंने नई ज़िम्मेदारियां ले ली हैं और हमें अपना सिर खुजलाने के लिए छोड़ दिया है.

सेना को युद्ध के सियासी मकसद की जानकारी जरूर होनी चाहिए ताकि वह गफलत में न रहे

राष्ट्रहित के लिए सेना को हमेशा चौकस रहना पड़ेगा कि उसकी कार्रवाइयां कहीं अनजाने में गलत मकसदों की खातिर अपनी तरफ से सही समझ कर न कर दें.

RBI को जोखिम भरे लोन ऐप्स, सहकारी बैंकों को रेग्युलेट करना चाहिए; ये बैंकिंग क्षेत्र को बीमार कर सकते हैं

बैंकिंग के कार्य में एक सामाजिक जिम्मेदारी शामिल है जिसका बैंकों को आरबीआई द्वारा दबाव डाले बिना स्वयं ही सम्मान करना चाहिए.

दक्षिण बनाम उत्तर की बहस नहीं बल्कि केंद्र की ‘एक राष्ट्र, एक नीति’ विभाजनकारी है

भारत में लोकतांत्रिक मॉडल संघीय है, लेकिन एक शक्तिशाली संघ की ओर थोड़ा झुका हुआ है, जो राज्यों के अधिकारों की कीमत पर और भी अधिक शक्ति अर्जित करता है.

चेन्नई ने 2015 की बाढ़ से सीखा, लेकिन अतिक्रमण ने इसे चक्रवात के प्रकोप के सामने खड़ा कर दिया

2023 की बाढ़ के दौरान बेहतर प्रबंधन और कम हताहतों के बावजूद, डीएमके सरकार बाढ़ के बाद की स्थिति को कुशलता से संभालने में सक्षम नहीं थी.

KCR का अंधविश्वास उन पर भारी पड़ गया, उन्हें इसके बजाय डिलीवरी और सुशासन पर फोकस करना चाहिए था

केसीआर का दो साल तक सचिवालय न जाना अंधविश्वास की छोटी सी बानगी है - नंबर छह के प्रति उनका प्यार भी काफी मशहूर है.

भारतीय व्यवसायी आशंकित भले हों लेकिन वे अभी भी मोदी सरकार को अपने लिए सबसे मुफीद मानते हैं

व्यवसायी वर्ग चाहता है कि नरेंद्र मोदी की सरकार वापस आए लेकिन वह अल्पमत सरकार हो और गठबंधन के सहयोगियों की बैसाखी के सहारे हो, जो उसकी किसी ज्यादती पर लगाम कसे रहें.

2024 के चुनाव में उत्तर बनाम दक्षिण का मुक़ाबला नहीं होने वाला, BJP की सीमाएं और गणित को समझें

यह कहना एक आलसी सरलीकरण होगा कि भारतीय राजनीति भाजपा-प्रेमी उत्तर भारत, और भाजपा- विरोधी दक्षिण में बंट चुकी है. 2024 का मुक़ाबला भाजपाई ‘हार्टलैंड’ बनाम परिधि वाले राज्यों का होगा.

मुसलमानों के पिछड़ेपन के लिए न तो कांग्रेस और न ही BJP ज़िम्मेदार, वे खुद इसके दोषी हैं

आज बुद्धिजीवी लगातार हिंदू प्रधान भारत में हाशिये पर पड़े मुसलमानों की मार्मिक कहानियों की खोज में लगे हुए हैं. एक पसमांदा मुस्लिम के रूप में मेरा नज़रिया प्रमुख कहानी से काफी अलग है.

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नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने आम आदमी पार्टी (आप) की नेता आतिशी के कथित रूप से ‘छेड़छाड़’ करके...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

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