जिस क्षण वे नैतिक श्रेष्ठता का दावा करना शुरू करते हैं और दूसरों पर अपनी प्राथमिकताएं थोपना शुरू करते हैं, वे हमें एक अधिनायकवादी राज्य के एक कदम और करीब ले जाते हैं जहां केवल बोलने की आजादी - जो आपके मुंह से निकलता है - का अधिकार ही नहीं है बल्कि दोपहर का भोजन और रात का खाना भी - जो आपके मुँह में जाता है — वह नागरिकों से छीन लिया जाता है.
1947 से अब तक, एक राष्ट्र के रूप में हमने अपने मानचित्रों, सीमाओं और विशेष प्रावधानों में आवश्यक समायोजन करके लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को पूरा किया है. आइए लद्दाख के लिए भी ऐसा ही करें.
तेलंगाना में पुलिस ने भारत राष्ट्र समिति सरकार के दौरान विपक्षी नेताओं के खिलाफ जासूसी करने के संदेह में पुलिस अधिकारी दुग्याला प्रणीत कुमार को गिरफ्तार किया है.
तीनों सेनाओं में युद्ध वाली तमाम ज़िम्मेदारियों में पनडुब्बी पर तैनाती को महिलाओं के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है क्योंकि उसमें जगह बहुत सीमित होने के कारण चालक दल/बंक मैनेजमेंट, आवास, प्राइवेसी को लेकर काफी कठिनाइयां होती हैं.
भारतीय मुसलमान होने के नाते, हम भाग्यशाली हैं कि हमें ऐसे उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ेगा जो हमें अपने देश से भागने के लिए मज़बूर करेगा, लेकिन हमें अपने पड़ोस में कम भाग्यशाली हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों पर विचार करना चाहिए.
हालांकि, एक साथ चुनाव कराना आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो सकता है, विपक्ष का कहना हो सकता है कि मोदी सरकार काम न करने वाली सरकारों को हटाने के नागरिकों के अधिकार की अनदेखी कर सकती है.
भाजपा की सीएए वाली सियासी चाल बहुत कारगर नहीं रही क्योंकि इससे जिन लोगों को लाभ मिलता उन्हें पहले से मौजूद कानून के तहत भी आसानी से शामिल किया जा सकता है और नए प्रवासियों को अलग-थलग रखा जा सकता है.
सीएए न केवल भेदभावपूर्ण है, बल्कि इसका उद्देश्य भेदभावपूर्ण होना भी है. यदि सरकार मुसलमानों को शामिल करने के लिए अपना दायरा बढ़ाती है, तो अधिनियम राजनीतिक रूप से अलोकप्रिय हो जाता है और इसलिए निरर्थक हो जाएगा.
एक चीज़ जो ट्रांस की खूबसूरती को ज़िंदा रखती है, वह है उनका समुदाय और अपनापन. लेकिन कानून बनाने वालों की नजर में, यह अपनापन ‘धोखा’, ‘लुभाना’ और ‘गलत असर डालना’ बन जाता है.