राज्य में बीरेन सरकार के लगातार कायम रहने से दोनों ही पक्षों की भावनाएं भड़की हुई हैं. कुकी इसे बहुसंख्यकवादी एजेंडा बढ़ाने वाली पक्षपाती सरकार के रूप में देखते हैं, जबकि मैतेई इसे उनकी रक्षा करने में अक्षम मानते हैं.
भारत का कारवां ऐसे लाखों अति प्रतिभाशाली लोगों द्वारा खींचे जा रहे विशालकाय रथ की तरह गति पकड़ते हुए आगे बढ़ रहा है, जिन्हें तैयार करना हमारे पुराने श्रेष्ठ संस्थानों के बस में नहीं हो सकता था.
उत्तर-पूर्व के किसी छोटे राज्य में आप तीन काम करने से परहेज ही करेंगे— स्थानीय नेताओं को कमजोर बताने से, ‘बांटो और राज करो’ की नीति से, और जातीय पहचानों को होमोजिनाइजेशन (एक जैसा बनाने या एक-दूसरे में मिलाने) से.
इस अनुकूल मुकाम तक पहुंचने के लिए भारत ने कड़ी मेहनत की है लेकिन अपने सरोकारों को मजबूती देने का सबसे बुद्धिमानी भरा उपाय जम्मू-कश्मीर को उसका राज्य का दर्जा लौटाना ही है.
हममें से अधिकतर लोगों के लिए मणिपुर का संकट नज़र से दूर, ख़यालों से बाहर वाला मामला है. इतने छोटे और इतनी दूर के इस राज्य की खबरों पर हम बड़ी जम्हाई लेने लगते हैं मगर मैं आपको जगाना चाहता हूं.
पाकिस्तान ज़्यादातर पैमाने के लिहाज़ से सिफर पर है, चीन सुस्त नहीं पड़ रहा है और भारत की गाथा अमीर बनने से पहले ही काफी शक्तिशाली बनने में कामयाबी की उल्लेखनीय कहानी है.
सत्ताधारी पार्टी को हराने की विपक्षी महत्वाकांक्षा बिलकुल जायज है. लेकिन इसके लिए उन्हें चाहिए— एक नेता, एक विचारसूत्र, और एक विचारधारा. अगर वे ये तीन चीजें नहीं जुटा पाते तो एक यही रास्ता बचता है कि वे भाजपा की सीटें कम करने के लिए राज्य स्तरीय, झगड़ा मुक्त गठजोड़ बनाएं
बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान की इस हफ्ते नई दिल्ली की दो दिन की यात्रा, एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ, को ‘बड़ा कूटनीतिक ब्रेकथ्रू’ माना जा रहा है.