अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सभी याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय मांगा जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया. अगली सुनवाई अब 14 नवंबर को होगी.
यह नर्मदा और गंजाल नदी पर संयुक्त सिंचाई परियोजना के तहत बनाया जाना है. इससे तीन जिलों- हरदा, होशंगाबाद और बैतूल के लगभग 2371 हेक्टेयर में फैले जंगलों का डूबना तय है.
ये याचिकाएं बच्चों के अधिकारों, संचार सेवाओं, राज्य में अस्पतालों, सामान्य चिकित्सा सेवाओं और पत्रकारों की बेरोकटोक आवाजाही को बहाल करने के लिए दायर की गई हैं.
1995 के अधिनियम की धारा 40 को हटाने और लंबे समय से चले आ रहे ‘एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ’ नियम को बदलने से भारतीय और इस्लामी वक्फ प्रणालियों के बीच की खाई और गहरी हो सकती है.