यह सुझाव विशेष रूप से आयरन की गोलियों और पोलियो ड्रॉप्स पर केंद्रित है. क्योंकि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में ये दवाएं मुख्य रूप से बच्चों को दी जाती हैं.
मोदी सरकार द्वारा राफेल सौदे की घोषणा के बाद फ्रांस ने सुलह के तौर पर अनिल अंबानी की 7.3 मिलियन यूरो की रकम स्वीकार ली, जबकि ये रकम 151 मिलियन यूरो की थी.
केवाईसी का काम तीसरे पक्ष से करवाना भी एक मसला है, क्योंकि वे बिना सोचे-समझे ग्राहकों से दस्तावेज़ मांगने के संदेशों की बमबारी करने के लिए जाने जाते हैं.