एन्विजा को भारत बायोटेक से ई-मेल के जरिए शुक्रवार को एक बयान मिला जिसमें यह सूचना दी गयी कि प्रेसिसा कंपनी ब्राजील में ‘भारत’ का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकृत नहीं रही है.
ऑक्सफैम रिपोर्ट रेखांकित करती है कि ये असमानताएं कोविड महामारी के दौरान कैसे उभर कर सामने आईं, जब ग़रीब लोग स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं का लाभ नहीं उठा सके.
एक स्वास्थ्य बुलेटिन में बुधवार को कहा गया कि पिछले 24 घंटे में 61 मरीज इस संक्रमण से मुक्त हुए हैं. मृतकों की संख्या 25,039 पर पहुंच गयी है जबकि संक्रमण के मामलों की कुल संख्या 14,35,671 पर पहुंच गयी है.
देश में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या भी बढ़कर 4,07,170 हो गई, जो कुल मामलों का 1.30 प्रतिशत है. मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 97.36% हो गई है.
दुनियाभर में 11,34,000 बच्चों ने अपने माता-पिता या संरक्षक दादा-दादी/नाना-नानी को कोविड-19 के कारण खो दिया. इनमें से 10,42,000 बच्चों ने अपनी मां, पिता या दोनों को खो दिया.
सरकार के मुताबिक सर्वेक्षण में शामिल किये गये स्वास्थ्य कर्मियों में 85 प्रतिशत में सार्स-सीओवी-2 के खिलाफ एंटीबॉडी है और स्वास्थ्य कर्मियों में 10 प्रतिशत का अब तक टीकाकरण नहीं हुआ है.
वैक्सीन डेंगवैक्सिया 9 से 45 वर्ष की आयु वाले उन लोगों को दी जानी है जो पहले डेंगू वायरस से संक्रमित हो चुके हैं और उन क्षेत्रों में रहते हैं जहां स्थानीय स्तर पर यह संक्रमण फैलता है.
जींद, झज्जर और कैथल में भी इसी तरह की निराशा भरी कहानियां साझा की गई हैं, जहां लोग टीका लगवाने के लिए लाइनें लगा रहे हैं लेकिन खुराकों की सप्लाई में कमी के चलते उन्हें वापस लौटाया जा रहा है.
अगले वीकेंड तक बांग्लादेश में एक चुनी हुई सरकार बन जाएगी. यह भारत के लिए मौका है कि वह चुनाव वाले पश्चिम बंगाल और असम में ‘घुसपैठिया’ वाली भाषा को नरम करके बिगड़े रिश्तों को फिर से ठीक करे.