वायरस और महामारी संबंधी वैज्ञानिकों का कहना है कि मनमाने ढंग से किसी कट-ऑफ का इस्तेमाल करने के बजाये बेहतर यह होगा कि कोविड पुन: संक्रमण के किसी मामले का पता लगाने के लिए तकनीक की सहायता ली जाए.
लांसेट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार वर्ष 1990 में भारत में जीवन प्रत्याशा 59.6 वर्ष थी जो 2019 में बढ़कर 70.8 वर्ष हो गई. केरल में यह 77.3 वर्ष हैं वहीं उत्तर प्रदेश में 66.9 वर्ष है.
वैक्सीन बीबीआईबीपी-कोरवी में, मारे गए वायरस एक अन्य घटक एलुमीनियम हाइड्रॉक्साइड के साथ मिलाए जाते हैं, जिसे एक सहायक पदार्थ एडजूवांट कहा जाता है, जो इम्यून रेस्पॉन्स को बढ़ाता है.
दिल्ली में इस सीजन की शुरुआत में 'बहुत खराब' वायु गुणवत्ता देखने को मिली है. डॉक्टर और विशेषज्ञ कह रहे हैं कि बढ़ते प्रदूषण से कोविड के मामलों में वृद्धि होगी.
दिप्रिंट को दिए एक इंटरव्यू में राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने, राज्य में एलडीएफ सरकार की खुलकर प्रशंसा करते हुए कहा, कि वो इस संकट से निपटने में ‘बहुत सक्रिय’ रही है.
आदेश में कहा गया कि मामले का परीक्षण किया गया और अस्पताल में औसत से कम मरीजों के भर्ती होने और एनडीएमसी की ओर से आग्रह मिलने के मद्देनजर इसे कोविड-19 निर्दिष्ट अस्पतालों की सूची से तत्काल प्रभाव से हटाया जा रहा है.
मंत्रालय ने डॉक्टरों से कहा है कि मौसमी बीमारियों और कोविड-19 के सह-संक्रमण की संभावना को देखते हुए, एक ‘उच्च संदेह सूचकांक’ बनाकर रखें और ‘निरंतर जागरूकता’ फैलाएं.
सरकार कड़वा सच क्यों नहीं बोल सकती, इसे समझना बहुत आसान है. तमाम युद्धों की तरह यह युद्ध भी जब रुक जाएगा तब भी भारत के हित विजेता के साथ भी जुड़े होंगे और हारने वालों के साथ भी.