अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में प्रकाशित एक स्टडी से पता चला है कि यह जोखिम निम्न और मध्यम आय वाले देशों में अधिक है. यह निष्कर्ष एक बड़े शोध का हिस्सा है.
बिल के विरोध में सरकारी योजनाओं का बहिष्कार करने वाले निजी अस्पताल, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के रोगियों को प्रभावित कर रहे हैं, जिन्हें अपने साधनों से अधिक भुगतान करने या इलाज के बिना जाने के लिए मजबूर किया जाता है.
सरकार की तरफ से अंग प्रत्यारोपण के इच्छुक मरीजों की अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने और वन नेशन वन वेटिंग लिस्ट की तरफ कदम बढ़ाने के बीच डॉक्टरों का कहना है कि प्रत्यारोपण के लिए अंग मिलने में तार्किक कमी को दूर करने की ज़रूरत है.
मेडिकल एजुकेशन सेक्रेटरी ने 14 जिला अस्पतालों में सी-सेक्शन डिलीवरी, बड़े ऑपरेशन और मरीज़ों के 2019 के डेटा की तुलना 2022 से की है, जब इन सुविधाओं को मेडिकल कॉलेजों में तब्दील किया गया था.
अभी तक भारत में करवाया जाने वाला स्वैच्छिक टीकाकरण काफी हद तक समाज के संपन्न वर्गों तक ही सीमित रहा है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार इस बात को महसूस करने के बाद कि कोविड के टीके लगवाने से क्या फर्क पड़ सकता है, लोगों का नजरिया बदल रहा है.
यूएसएफडीए ने एक बयान में कहा कि चेन्नई स्थित कंपनी इजरीकेयर, एलएलसी और डेलसैम फार्मा द्वारा उपभोक्ता स्तर पर वितरित की जा रही ‘आर्टिफिशियल टियर्स ल्यूब्रीकैंट’ आईड्रॉप को संभावित खामी के चलते वापस ले रही है.
सुनील बताते हैं कि जब उन्होंने यह कार्यक्रम शुरू किया था और महिलाएं चार्ट घरों में लगाती थीं तो कई बार घर के ही सदस्य इन्हें फाड़ देते थे और पीरियड चार्ट को ऐसे घर पर लगाना सही नहीं मानते थे.
औपनिवेशिक खुफिया तंत्र क्रांतिकारियों को व्यक्ति के रूप में नहीं बल्कि खतरे के रूप में दर्ज करता था. ऐसा करके उसने कई ज़िंदगियों को इतिहास से निष्कासित कर दिया.