केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि अब से मरीज को इस आधार पर एडमिट करने से नहीं मना किया जा सकेगा कि वह जिस शहर से है उसका वैध दस्तावेज नहीं दे पा रहा है, जहां पर अस्पताल स्थित है.
देशभर में हर दिन सामने आ रहे नए केस पिछले साल की तुलना में 300 फीसदी अधिक है, जिसका सीधा-सा मतलब है कि ये बुनियादी ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे पर दबाव बढ़ाएंगे.
तमिलनाडु के चेंगलपट्टू सरकारी अस्पताल में मंगलवार रात 13 कोविड मरीजों की मौत के मामले को भी देश के अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी कमी से जुड़ी घटना बताया जा रहा है.
स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव ने कहा, पिछली बार की अपेक्षा प्रदेश में कोविड की दूसरी लहर चार गुना ज्यादा भारी है. हम दूसरी लहर के लिए तैयार थे लेकिन ऐसी लहर के लिए नही जो चार गुना ज्यादा भारी होगी.
कुछ मामलों में यह बात सामने आई है कि कोविन पोर्टल के माध्यम से कोविड-19 टीकाकरण के लिए समय लेने वाले कुछ लोग टीका लगवाने के लिए तय तारीख पर नहीं पहुंच सके और उन्हें एसएमएस से सूचना मिल गई कि उन्हें टीके की खुराक दी जा चुकी है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण चुनाव जीतने की संभावना बढ़ाने के लिए किया गया लगता है, लेकिन एक बड़ा कानूनी सवाल है: क्या इससे उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है?